जागरण संवाददाता, मीरजापुर : मचान विधि से खेती तो है पुरानी विधि लेकिन आज भी काफी लाभप्रद है। विधि से खेती करके किसानों की उपज बढ़ने से आमदनी भी बढ़ रही है। जैविक खाद का प्रयोग करने से फसल सेहत के लिए भी फायदेमंद है। वर्तमान समय में जिले में लगभग 48 एकड़ में मचान विधि से किसान खेती करके आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में जहां पूरा देश परेशान था। सब्जी, फल आदि की लोगों को आपूर्ति शासन-प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में जनपद के प्रगतिशील किसानों ने मचान विधि से जैविक खाद का उपयोग करते हुए स्वास्थ्यवर्धक सब्जी व फसल उगाकर मदद की। सबसे बड़ी बात जैविक विधि से खेती करने से खेतों की सेहत भी सुधर रही हैं।

जनपद में चंद्रमौली पांडेय सीखड़, कृष्णकांत त्रिपाठी भुआवलपुर, बेचन सिंह विट्ठलपुर, मुकेश त्रिपाठी भुआवल, अखिलेश गोरिया, कनकलता विट्ठलपुर में मचान विधि से लौकी, करेला, कोहड़ा आदि की खेती कर रही हैं। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), कृषि विभाग और उद्यान विभाग जनपद के प्रगतिशील किसान की खेती योजनाओं के माध्यम से मदद कर रहे हैं। रूरल मार्ट के माध्यम से कोरोना काल में भी कृषक उत्पादन संगठन (एफपीओ) से घर-घर हरी सब्जी पहुंचाने का कार्य किया गया। शासन-प्रशासन कृषक उत्पादन संगठन का गठन करके कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, उत्पाद की गुणवत्ता बरकरार रखते हुए उसकी मार्केटिग सुनिश्चित कर रहा है, जिससे किसानों को उपज का अच्छा मूल्य भी प्राप्त हो सके। मुकेश पांडेय ने बताया कि कृषि विभाग के सहयोग से नव चेतना कृषक उत्पादक संगठन का सृजन किया गया है, जिसमें 1267 किसान सम्मिलित है। वहीं एफपीओ वर्मी कम्पोस्ट का 8000 कुंतल प्रति वर्ष उत्पादन करती है। मचान विधि

मचान विधि में तार का जाल बनाकर सब्जियों की बेल को जमीन से ऊपर तक पहुंचाया जाता है। इससे बेल वाली सब्जियों को आसानी से उगा सकते हैं। इसके साथ ही फसल को कई रोगों से बचाया जा सकता है।

वर्शन मचान विधि काफी लाभकारी है। इससे कम समय और उर्वरक में सब्जी आदि की अच्छी पैदावार होती है। किसान इस विधि का लाभ उठाकर अच्छी उपज से आमदनी को बढ़ा सकते हैं।

मेवा राम, जिला उद्यान अधिकारी।

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