जागरण संवाददाता, मीरजापुर : नगर के फतहां स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय के परिसर में विद्युत कर्मचारियों ने इलेक्ट्रिसिटी बिल 2020 के विरोध में सोमवार को काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने मुख्य अभियंता के माध्यम से केंद्र सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर लागू किए जाने वाले बिल को वापस लेने की मांग की। चेताया कि अगर सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती है तो वे लोग हड़ताल पर जाने को विवश होंगे।

कहा कि केंद्र सरकार द्वारा निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के वायदे को खारिज करते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त समिति ने स्पष्ट किया कि वस्तुत: निजीकरण किसानों और आम घरेलू उपभोक्ताओं के साथ धोखा है। निजीकरण के बाद बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि होगी। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल में कहा गया हैं कि नई टैरिफ नीति में सब्सिडी और क्रास सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी। किसी को भी लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी। अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च वालों को सब्सिडी मिलती है। जिसके चलते इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी। बिजली की लागत का राष्ट्रीय औसत 6 रुपये 72 पैसे प्रति यूनिट हैं। निजी कंपनी द्वारा एक्ट के अनुसार कम से कम 16ं प्रतिशत मुनाफा लेने के बाद आठ रुपये प्रति यूनिट से कम दर पर बिजली किसी को नहीं मिलेगी। इस तरह एक किसान को लगभग 6000 रुपये प्रतिमाह बिल देना होगा जबकि उपभोक्ताओं को छह से आठ हजार रुपये अदा करने होंगे। क्रास सब्सिडी समाप्त होने से उद्योगों और व्यवसाइयों को इससे फायदा होगा। इलेक्ट्रिसिटी बिल 2020 पारित हो गया तो बिजली के मामले में राज्यों के अधिकार का हनन होगा और स्टाफ तय करने से लेकर बिजली की शिड्यलिग तक में केंद्र का दखल होगा। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान जीपी सिंह, अवधेश यादव, अनिल शुक्ला, राम सिंह, अभय सिंह, विनोद चौधरी, राजेश गौतम, सूरज शाह, उदय सिंह, विनीत सिंह, अनुराग अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस