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शारदीय नवरात्र पर मां विंध्यवासिनी का नहीं लगेगा शयन, भक्तों के लिए 20 घंटे खुला रहेगा दर्शन

By Amit kumar tiwari/Anand Mohan MishraEdited By: Abhishek sharma
Published: Sat, 10 Oct 2026 03:23 PM (GMT+05:30)

शारदीय नवरात्र के दौरान मां विंध्यवासिनी का शयन नहीं लगेगा, जिससे भक्त 20 घंटे तक लगातार दर्शन कर सकेंगे। इस ...और पढ़ें

HighLights

  1. मां विंध्यवासिनी का नवरात्र में नहीं लगेगा शयन।

  2. भक्तों के लिए 20 घंटे खुले रहेंगे दर्शन-पूजन के द्वार।

  3. चार भव्य आरतियां होंगी, चरण स्पर्श पर प्रतिबंध।

जागरण संवाददाता, विंध्याचल (मीरजापुर)। शारदीय नवरात्र के दौरान मां विंध्यवासिनी का शयन नहीं लगेगा अर्थात मां विश्राम नहीं करेंगी। भक्तों के लिए दर्शन पूूजन 20 घंटे अनवरत खुला रहेगा। नवरात्र में मां के भक्तों को चार समय भव्य-दिव्य आरती का दर्शन मिलेगा, इसमें मंगला, मध्यान्ह, संध्या व बड़ी आरती होगी। साथ ही मां विंध्यवासिनी के चरण स्पर्श पर नवरात्र में पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।

शारदीय नवरात्र आगामी 10/11 अक्टूबर से प्रारंभ होकर नौ दिवसीय नवरात्र मेला 20 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें देश के कोने-कोने से मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नव्य भव्य विंध्य नगरी एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति, भव्यता और दिव्यता के रंग में रंगने को तैयार है।

मां विंध्यवासिनी देवी के साथ मां काली और मां अष्टभजा भक्तों को अनवरत दर्शन और आशीर्वाद प्रदान करेंगी। विंध्य क्षेत्र में विशेष सुरक्षा के साथ मंदिर परिसर में विशेष सजावट और सेवा की व्यवस्था की गई है। विंध्य पंडा समाज की ओर से मां के श्रृंगार और आरती का विशेष समय निर्धारित किया गया है। श्रृंगार का विशेष महत्व होने के कारण, प्रत्येक आरती से पहले मां का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। निर्धारित ड्रेस में ही पुरोहित भक्तों को दर्शन पूजन कराएंगे।

मां विंध्यवासिनी मंदिर के श्रृंगारिया शेखर शरण उपाध्याय ने बताया कि नवरात्रि में प्रतिदिन भिन्न-भिन्न रुपो में मां विंध्यवासिनी का श्रृंगार किया जाएगा। भक्तों को हर दिन नई झांकी के दर्शन होंगे।

मां विंध्यवासिनी का श्रृंगार और आरती का समय
भोर 3:00 से 4:00 बजे तक : मंगला आरती
दोपहर 12:00 से 1:00 बजे तक : मध्याह्न आरती
शाम 7:00 से 8:00 बजे तक : संध्या आरती
रात 9:30 से 10:30 बजे तक : बड़ी आरती
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मां काली के प्राचीन स्थल कालीखोह मंदिर में नवरात्र में विशेष तैयारी की गई है। पुरोहित हेमंत मिश्र ने बताया कि श्रृंगार और आरती के समय भक्तों को मां काली के अलौकिक रुप के दर्शन होंगे।
मां काली का श्रृंगार और आरती का समय
सुबह 5:00 से 6:00 बजे : प्रथम श्रृंगार
दोपहर 12:00 से 1:00 बजे : मध्यान्ह श्रृंगार।
रात 9:00 से 10:00 बजे : रात्रि श्रृंगार।
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मां अष्टभुजा मंदिर में भी भव्य श्रृंगार और आरती के बाद दर्शन होगा। पुरोहित धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि अद्भुत और चमत्कारी शक्तिपीठ मां अष्टभुजा मंदिर में भी मां का विशेष श्रृंगार तीन समय होगा। श्रद्धालु भक्ति भाव से मां का दर्शन व पूजन कर सकेंगे।
सुबह 5:00 से 6:00 बजे : प्रातः श्रृंगार
दोपहर 12:00 से 1:00 बजे : मध्याह्न श्रृंगार
रात्रि 9:00 से 10:00 बजे : रात्रि श्रृंगार

आरती के समय मजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारियों को ड्यूटी पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। मां की आरती के बाद दर्शन आरंभ हो जाएगा।


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अविनाश कुमार, नगर मजिस्ट्रेट।