दिव्या मित्तल के वीडियो जारी होने के बाद बनने लगा था मीरजापुर में स्कूल, अब वन विभाग ने लगाई रोक
मीरजापुर के लहुरियादह गांव में पूर्व डीएम दिव्या मित्तल के प्रयास से शुरू हुए स्कूल निर्माण को वन विभाग ने ...और पढ़ें

मीरजापुर में स्कूल निर्माण पर वन विभाग ने लगाई रोक, भूमि विवाद से ग्रामीण निराश।
HighLights
दिव्या मित्तल के वीडियो के बाद मीरजापुर में स्कूल निर्माण शुरू हुआ।
वन विभाग ने आवंटित भूमि को अपनी बताकर निर्माण कार्य रोका।
भूमि विवाद से ग्रामीण निराश, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल।
जागरण संवाददाता, ड्रमंडगंज(मीरजापुर)। जिले की सियासत में दिव्या मित्तल की इंट्री की जानकारी सामने आने के बाद सियासत और दिव्या मित्तल दोनों ही एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। गत 29 सितंबर को मीरजापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा वीडियो जारी कर वक्तव्य देने व दैनिक जागरण में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन की तंद्रा टूटी और फाइलों में गुम स्कूल ने धरातल पर मूर्त रूप लेना शुरू कर दिया।
लेकिन, विद्यालय निर्माण को लेकर बीते रविवार को एक नया मोड़ आ गया आवंटित की भूमि पर वनविभाग ने दावा करते हुए निर्माण कार्य रोक दिया। बहुप्रतीक्षित विद्यालय का निर्माण कार्य रोका जाना 'आसमान से गिरा खजूर में लटका' वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। वहीं वनविभाग द्वारा विद्यालय निर्माण कार्य रोका जाना क्षेत्रीय लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन हुआ है।
गत 30 सितंबर को बीइओ हलिया प्रकाश चंद्र यादव ने ग्राम प्रशासक कौशलेंद्र गुप्ता व टीम के साथ लहुरियादह गांव पहुंचकर आवंटित भूमि का चिन्हांकन करवाते हुए निर्माण कार्य शुरू करवाया। लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने के पांचवें दिन ही चार अक्टूबर (रविवार) दोपहर को मौके पर पहुंचकर वनविभाग की टीम ने आवंटित भूमि को वन भूमि बताते हुए निर्माण कार्य रोक दिया।
विद्यालय की नींव भराई का कार्य कर रहे राजगीर मिस्त्री बद्री प्रसाद का सामान व श्रमिकों का फावड़ा तगाड़ी आदि वनविभाग की टीम उठा ले गई। राजगीर मिस्त्री बद्री प्रसाद ने बताया कि रविवार दोपहर में वनविभाग की टीम मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने बताया कि जिस जगह पर विद्यालय का निर्माण करवाया जा रहा है वह भूमि वनविभाग की है।
टीम ने मिस्त्री व श्रमिकों को बताया कि विद्यालय का निर्माण वन भूमि पर करवाया जा रहा है। वहीं विद्यालय का निर्माण कार्य रोके जाने पर ग्रामीणों में निराशा व्याप्त हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर कार्य करवाया जा रहा है वहां पर पेड़-पौधे आदि भी नही है फिर भी वनविभाग कार्य अड़ंगा डाल रहा है।
वहीं लेखपाल निखिल पाठक ने बताया कि विद्यालय के लिए आवंटित की गई भूमि आराजी नंबर 1116 ग रकबा 0.169 हेक्टेयर करीब 13 बिस्वा भूमि ग्राम सभा राजस्व विभाग की है। इसके बावजूद वनविभाग उस भूमि पर अपना दावा कर रहा है मामले को उच्चाधिकारियों से अवगत कराया गया है।
वहीं रेंजर ड्रमंडगंज रविशंकर शर्मा का कहना है कि लहुरियादह गांव में जिस भूमि पर उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण करवाया जा रहा है वह वनविभाग की भूमि है।जिसका निर्माण कार्य रोक दिया गया है। विद्यालय का निर्माण कार्य रोके जाने से क्षेत्रीय लोगों में तहसील प्रशासन व वनविभाग के कार्यों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हो रही है।
विद्यालय की आवंटित भूमि पर वनविभाग के दावे को लेकर जिले अधिकारियों की कार्य शैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह है कि मामले की जांच के बाद उक्त भूमि वनविभाग के पाले में जाती है या राजस्व विभाग के, फिलहाल विद्यालय का निर्माण कार्य रोके जाने से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीण हीरा यादव, चौरसिया देवी, राजकुमार, हरिलाल आदि ने बताया कि यदि विद्यालय के लिए आवंटित की गई भूमि वनविभाग की थी तो तहसील प्रशासन ने कैसे उक्त भूमि को विद्यालय निर्माण हेतु आवंटित कर दिया यह जांच का विषय है।इस संबंध में बीएसए मीरजापुर अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि उन्हें उच्च प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के निर्माण कार्य रोके जाने की कोई जानकारी नही है। उक्त संबंध में बीइओ हलिया से बात कर सकते हैं।
इस संबंध में रेंजर ड्रमंडगंज रविशंकर शर्मा ने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह का वन भूमि पर निर्माण करवाया जा रहा था जिसे रोक दिया गया है। वनविभाग के मानचित्र में आराजी नंबर 730 व 732 में विद्यालय का निर्माण करवाया जा रहा है।
जबकि 1359 फसली के वनविभाग के नक्शे में आराजी नंबर 733 में राजस्व विभाग की भूमि है जिस पर विद्यालय का निर्माण करवाया जा सकता है।लहुरियादह में विद्यालय निर्माण के लिए भूमि आवंटित करते समय राजस्व विभाग की टीम ने वनविभाग से कोई संपर्क नही किया और मनमानी तरीके से वन भूमि पर विद्यालय निर्माण हेतु भूमि आवंटित कर दिया।
