जागरण संवाददाता, जमालपुर (मीरजापुर) : स्थानीय बाजार में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की मांग मात्र चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। लगभग दो दशक से लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा सभी प्रत्याशियों के स्थानीय घोषणा पत्र में रहता है लेकिन चुनाव बीतने के बाद यह मुद्दा पुन: ठंडे बस्ते में चला जाता है। राजनीति दलों की ऐसी कलुषित सोच से युवा मतदाता चुनाव बाद स्वत: को ठगा महसूस करते है। पहली बार पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह के जमाने में स्थानीय लोगों ने जमालपुर बाजार में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की मांग किया था। तभी से हर चुनाव में नेता इस मुद्दे को स्थानीय स्तर पर युवाओं से भुनाने का प्रयास करते चले आ रहे हैं।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे ने जोर पकड़ा था। लगभग सभी दलों ने चुनाव बाद इस मुद्दे के समाधान का भरोसा दिलाया था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भी इस मुद्दे पर खूब राजनीति हुई। लेकिन निष्कर्ष फिर से शून्य ही रहा। राजकीय महाविद्यालय न रहने से सर्वाधिक समस्या छात्राओं को उठानी पड़ती है। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूरस्थ जाना पड़ता है। ऐसी दशा में तमाम छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित हो जा रही हैं। युवा वर्ग इस बार के लोकसभा चुनाव में महाविद्यालय स्थापना को एक बार फिर धार देने के मूड में दिखाई दे रहा है। युवाओं का आरोप है कि सरकार,'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा जमकर बुलंद कर रही है लेकिन अब इसे अमलीजामा पहनाने का समय आ गया है।

डिग्री कालेज की हो स्थापना

क्षेत्र के छात्र अभिषेक दुबे, संध्या, रामबाबू, बेटू, पिटू सिंह, नीरज सिंह, शैलेंद्र सिंह आदि ने जनहित में डिग्री कालेज की स्थापना तत्काल किए जाने की मांग की है।

Posted By: Jagran