जागरण टीम, मीरजापुर : कहते हैं कि असली भारत को देखना हैं तो आप गांवों का ख करें। विकास की सारी हकीकत खुद अपने आप बयां हो जाएगी। ऐसा ही कुछ नजारा मीरजापुर जिला मुख्यालय के नुआवं गांव में देखने को मिला। देश व प्रदेश के विकास की हकीकत जाननी है तो जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र के गांवों का अवश्य रूख करना चाहिए। अमूमन यही हाल आपको हर गांव में देखने को मिल जाएगा। देश की आजादी के बाद भी गांवों की जनता बेहतर गांवों में चिकित्सा सेवा, शिक्षा खासकर बालिका शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी जूझ रही है। हालांकि पिछली सरकार द्वारा लोगों को कम से कम सिर छिपाने के लिए एक अदद आवास, पेयजल व महिलाओं को धुंआ रहित चूल्हे पर भोजन बनाने की समस्या से निजात दिलाया है। गांवों में भी रहने वाले बेरोजगार युवाओं द्वारा रोजगार के अवसर मुहैया कराने की मांग की जा रही है। खासकर मनरेगा योजना के सफल क्रियान्वयन की मांग करते हुए 100 दिन का रोजगार देने पर बल दिया। आज भी गांवों में बेहतर चिकित्सा सुविधा का टोटा है। सीएचसी व पीएचसी पर ग्रामीणों को आज भी बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। आजादी के इतने वर्ष बाद भी महिलाओं को रात में प्रसव पीड़ा होने पर उसी टूटी-फूटी सड़क पर हिचकोले खाते हुए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। कारण कि गांवों में बने पीएचसी और सीएचसी पर डाक्टर साहब और उनके पैरामेडिकल स्टाफ रात में नदारद रहते है। शिक्षा का हाल तो उससे भी बुरा है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय है भी तो कुछ के भवन जर्जर हालत में है। स्कूलों में सभी शिक्षकों की तैनाती नहीं होने से अकेले मास्टर साहब पढ़ाने के अलावा एमडीएम, जनगणना, चुनाव, बीएलओ ड्यूटी सब कुछ करते हैं। खेल का विकास तो दूर गांवों में खेल का मैदान तक नहीं है। खेल में करियर बनाने के इच्छुक युवा तो आर्थिक तंगी के चलते गांव में व्यवस्था नहीं होने के कारण मन मसोस कर रह जाते हैं। लेखपालों की मनमानी के चलते गांवों में आज भी कई किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना से वंचित होना पड़ा। सामाजिक आर्थिक व सामाजिक जातिगत जनगणना की सूची में नाम नहीं होने के कारण आज भी कई पात्र किसानों को आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिल पाया क्योंकि सर्वेक्षण करने वाले लोगों द्वारा मनमानी करते हुए अपात्रों का नाम सूची में शामिल कर दिया गया है। पिछली सरकार में चल रही पेंशन योजना का लाभ मिलने के बावजूद बिना कारण बताए पेंशन को बंद कर दिया गया। उक्त बातें बताते हुए विकास खंड सिटी के नुआवं गांव में दैनिक जागरण के चुनावी चौपाल में बोलते हुए ग्रामीण खुलकर बोले। स्थानीय मुद्दे

-गांव में पंचायत भवन बनाया जाए।

-मत्स्य पालन के लिए तालाब की खोदाई हो।

-प्राइमरी स्कूलों की दशा को सुधारा जाए।

-गांव में आंगनबाड़ी केंद्र बनवाया जाए।

-क्षेत्रफल के अनुसार गांवों को बजट मिले।

-फसल बर्बाद करने वाले छुट्टा पशुओं पर अंकुश लगे। राष्ट्रीय मुद्दे

-ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की हो तैनाती।

-शिक्षकों से शिक्षा के इतर न कराये कार्य।

-आवास, स्वास्थ्य आदि की समुचित सुविधा मिले।

-वृद्धा, विधवा, दिव्यांग पेंशन मिले।

-बालिका शिक्षा के लिए इंटर कालेज की स्थापना।

-गांवों में वाईफाई की सुविधा मिले।

-गांवों में रोजगार के समुचित अवसर मिले। मतदाताओं से अपील

-देश का विकास करने वाले जनप्रतिनिधि को दें वोट।

-ऐसे जनप्रतिनिधि को कदापि न दे वोट जो कभी कभार दिखे।

-मतदान के लिए एक दुसरे को करें जागरूक।

-लोकसभा चुनाव में अवश्य मतदान करें।

-मतदान से ही देश में विकास व परिवर्तन हो सकता है।

Posted By: Jagran

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