जागरण संवाददाता, मीरजापुर : श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या से शुरू हुआ रामायण कांक्लेव का तीसरा चरण गोरखपुर व बलिया के बाद मां विध्यवासिनी के आंगन में बुधवार को रिमझिम बारिश के बीच शुरू हुआ। मंडलायुक्त योगेश्वरराम मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर विध्याचल के रोडवेज बस स्टैंड परिसर में आयोजित रामायण कांक्लेव का उद्घाटन किया।

दो दिवसीय रामायण कांक्लेव की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत शाम सात बजे से होनी थी, लेकिन बारिश के चलते काफी विलंब से शुरू हुई।

मुख्य अतिथि मंडलायुक्त ने कहा कि आज विश्व का लोकतंत्र दिवस है। राम से बड़ा लोकतांत्रित ब्रह्मंड में कोई नहीं है। राम से जुड़े अनेक संर्दभों को नृत्य, गीत-संगीत के माध्यम से जन-जन पहुंचाया जाए और रामराज्य के रूप में आदर्श लोकतंत्र, आदर्श समाज व आदर्श राज्य की संकल्पना हो, यही रामायण कांक्लेव का प्रयास है। निश्चित रूप से यह प्रयास सफल होगा। मंडलायुक्त को स्मृति चिन्ह् देकर सम्मानित किया गया।

संस्कृति व पर्यटन विभाग की ओर से विध्याचल में 16 सितंबर तक चलने वाले रामायण कांक्लेव में करीब दर्जन भर से अधिक लोक कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति करेंगे। रामकथा के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित संगोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रामलीला, कवि सम्मेलन के साथ रामायण कांक्लेव का समापन होगा। सूचना विभाग के डायरेक्टर डा. लवकुश द्विवेदी ने बताया कि सामाजिक समरसता का संदेश प्रसारित करना, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की सीख देना और कलाकारों को मंच प्रदान करना रामायण कांक्लेव का मुख्य उद्देश्य है। रामायण कांक्लेव के लिए प्रदेश भर के लगभग ढाई हजार कलाकार लगाए गए हैं। रामायण कांक्लेव की शुरुआत अयोध्या से हुई है तो समापन भी एक नवंबर को अयोध्या में ही होगा। इस दौरान रामायण कांक्लेव के मुख्य वक्ता अयोध्या के महंत गिरीश पति त्रिपाठी व डा. सभापति मिश्र प्रयागराज, जनार्दन मिश्र वाराणसी, नीलम शास्त्री वाराणसी, डा. उषा शुक्ला दक्षिण अफ्रीका अतिथि रूप में उपस्थित थीं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. देवी प्रसाद दुबे भी मौजूद थे।

बारिश से गिरा टेंट, मचा भगदड़

राम और आस्था पर गोष्ठी व परिचर्चा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ होने से पहले ही तेज हवा व बारिश के चलते कार्यक्रम स्थल पर लगा टेंट गिर पड़ा। टेंट गिरने की आवाज सुन वहां भगदड़ मच गई। गनीमत रहा कि बगल स्थित विद्युत पोल पर टेंट नहीं गिरा अन्यथा किसी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता था। किसी तरह टेंट के ऊपर लगे पर्दे से पानी गिराया गया, तब जाकर दर्शकों में राहत हुई।

Edited By: Jagran