जागरण संवाददाता, मीरजापुर : जैविक खेती में यदि नए शोध के जैविक उर्वरक का प्रयोग हो तो भोजन का स्वाद बदल जाएगा और इसकी पौष्टिकता इतनी बढ़ जाएंगी कि बीमारियां होने का खतरा 50 फीसद तक कम हो जाएगा। काशी ¨हदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान द्वारा जैविक रसायन पर लगातार नवीनतम शोध किए जा रहे हैं। किसान इन नई शोध तकनीक का प्रयोग करके घर पर ही मात्र पांच से 10 रुपए में एक किलो जैविक उर्वरक तैयार कर सकते हैं, जिसके प्रयोग से उनकी जैविक खेती और उन्नत व पैदावार बेहद पौष्टिक हो जाएगी। जैव उर्वरक पर शोध कार्य करने वाले सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर डा. जेपी वर्मा ने बताया कि मुख्य रुप से जैविक खाद किसानों की सब्जी व अन्य फसलों के उत्पादन को बढ़ाता है। इसके लिए समय-समय पर मिट्टी की जांच भी करानी चाहिए। जैविक उर्वरक का प्रयोग धान, गेहूं, चना, मटर, अरहर, मक्का, सरसों व सब्जियों पर किया जा सकता है। इसमें बीच का उपचार तो होता ही है साथ में पौधों की जड़ों, कंद व पत्तियों का भी उपचार होता है। जैविक उर्वरक के प्रयोग से अनाज के दाने सुडौल, स्वस्थ, खनिज तत्वों से भरपूर और स्वाद में समृद्ध होते हैं। जिससे बनने वाला भोजन जायकेदार, लाजवाब बन जाता है। डा. जेपी वर्मा ने बताया कि जैविक उर्वरक के प्रयोग से 50 फीसद तक रासायनिक खाद बचाया जा सकता है और इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती रहती है। उन्होंने नरायनपुर ब्लाक के बेला व नौगरह गांव में करीब 150 किसानों को एक संगोष्ठी के माध्यम से जैविक खेती व जैविक रसायन के फायदों से अवगत कराया। दूर होंगी यह बीमारियां

परियोजना संचालक डा. जेपी वर्मा व उनकी रिसर्च टीम में शामिल रहे आनंद कुमार गौरव, गोवर्धन कुमार चौहान, दुर्गेश कुमार जायसवाल व अजीत ¨सह ने किसानों को घर पर ही उर्वरक बनाने की तकनीक बताई। रिसर्च टीम के वैज्ञानिकों ने बताया कि जैविक उर्वरक के प्रयोग से पेट व सिर दर्द, अल्सर, कैंसर, हार्ट अटैक, लकवा, नपुसंकता व हड्डियों के कमजोर होने जैसी बीमारियां कम हो जाएंगी व व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा।

Posted By: Jagran

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