World Mental Health Day: तनाव छिपाएं नहीं, कंट्रोल करें; वरना घेर सकते हैं साइकोसिस व अन्य मानसिक रोग, एक्सपर्ट्स के टिप्स
World Mental Health Day: युवाओं में तेजी से बढ़ रहे साइकोसिस और अन्य मानसिक बीमारियों के मामले चिंताजनक हैं। विशेषज्ञ ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
मेरठ में युवाओं में साइकोसिस के मामले तेजी से बढ़े।
तनाव, नींद की कमी, स्क्रीन टाइम मुख्य कारण।
जागरण संवाददाता, मेरठ। World Mental Health Day 2026: हर वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक करना है। इस बार इस दिवस की थीम है 'जीने के अनुभवों को सुना गया', सच्ची आवाजें, वास्तविक बदलाव है।' विशेषज्ञों के अनुसार, यह मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के अनुभव सुनने और स्वास्थ्य सेवाओं तथा नीतियों में उनकी सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने को प्रेरित करती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार विश्व में लगभग एक अरब लोग किसी न किसी प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं। इन परेशानियों में साइकोसिस भी है। ऐसी चीजें महसूस करना, जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं। ऐसी आवाजें सुनना, जो दूसरों को सुनाई नहीं देतीं और वास्तविकता से परे विचार आना। ये साइकोसिस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
इस समस्या के साथ लोग इलाज के लिए मेडिकल कालेज पहुंच रहे हैं। तनाव और नींद की कमी के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक सामने आए 66 मामलों में अधिकांश मरीज 20 से 35 वर्ष के युवा हैं।
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के मानसिक रोग विभाग की एक जनवरी से एक अक्टूबर तक इलाज के लिए भर्ती मरीजों की रिपोर्ट में तनाव, नशे की लत और साइकोसिस के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है। इस अवधि में तनाव संबंधी सर्वाधिक 113, नशे की लत के 92 और साइकोसिस के 66 मामले सामने आए।
इसके अलावा बाईपोलर डिस आर्डर, डिसोसिएटिव डिस आर्डर, डिप्रेशन, चाइल्ड मेंटल रिटार्डेशन और डिमेंशिया सहित अन्य मानसिक बीमारियों के मरीज भी भर्ती हुए। सामान्य दवाओं और उपचार से अपेक्षित सुधार नहीं होने पर विशेषज्ञों के चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद मरीजों का इलाज किया गया।
ऐसे पहचानें डिप्रेशन
- डिप्रेशन में व्यक्ति का व्यवहार बदल जाता है।
- ठीक से नींद नहीं आना, कम भूख लगना।
- अपराध बोध होना, आत्मविश्वास में कमी आना।
- थकान महसूस करना, उदासी बनी रहना।
- खुदकुशी करने का विचार आना, अकेले रहने को सोच।
मानसिक परेशानी शुरू होते ही उपचार है आसान: डा. रवि राणा

मानसिक रोग विशेषज्ञ डा. रवि राणा कहते हैं कि किसी भी देश की उन्नति के लिए उसके नागरिकों का मानसिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। नई पीढ़ी के मानसिक रूप से मजबूत होने पर भी पूरा ध्यान देने की आवश्यकता है। देर रात तक जागना, काम करना और संयुक्त परिवारों का विघटन मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
डा. राणा के अनुसार लगातार तनाव, एंजाइटी या डिप्रेशन से कार्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा रहता है। इससे हृदय, फेफड़ों, प्रतिरोधक क्षमता और हार्मोन संतुलन पर असर पड़ता है। बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हमें शुरुआती स्तर पर मानसिक परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तत्काल उपचार की ओर ध्यान देना चाहिए। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर दवा, काउंसिलिंग और दूसरी तकनीकों से ऐसी परेशानियों को जल्दी दूर कर सकते हैं।
तनाव छिपाने के बजाय नियंत्रित करने की कोशिश करें

एलएलआरएम कालेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. तरुण पाल के अनुसार एआई, डिजिटल एप्स, गेम्स और देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद कम हो रही है और तनाव बढ़ रहा है। इसका बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर साइकोसिस के रूप में पड़ रहा है।
तनाव छिपाने के बजाय नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए। आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है, इसलिए मानसिक बीमारियों पर नियंत्रण आवश्यक है। बचाव के लिए सुबह 30 मिनट रोजाना टहलें, योग, मेडिटेशन करें। सात से आठ घंटे की गहरी नींद बेहद जरूरी है। स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें।
