मेरठ। सारागढ़ी का युद्ध भारतीय सेना के इतिहास का एक चमकता हुआ क्षण था जो टिरा कैंपेन के पहले लड़ा गया था। भारतीय सेना के एडीजीपीआइ की ओर से सोशल मीडिया पर उन 21 वीर शहीद सिख सपूतों की शहादत और वीरता की गाथा देशवासियों के साथ साझा की है। ब्रेव संस ऑफ इंडिया के हैसटैग के साथ दी गई सूचना पर देश भर सैन्य व असैन्य लोगों ने वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस (अब खैबर पख्तूनख्वा) पाकिस्तान में 21 सैनिकों ने हवलदार इशर सिंह की अगुवाई में 10 हजार अफगानों का सामना किया था। सारागढ़ी पोस्ट फोट गुलिस्तान और फोर्ट लॉकहार्ट के बीच स्थित था। सैन्य इतिहासकार इस युद्ध को इतिहास में 'ग्रेटेस्ट लास्ट स्टैंड' माना है।

मेरठ में भी याद की कुर्बानी

मेरठ छावनी स्थित सारागढ़ी मेमोरियल पर भी सेना की ओर से सभी शहीद जवानों की शहीद बेदी के साथ ही वार मेमोरियल पर पुष्प चढ़ा कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा वेदव्यासपुरी स्थित योद्धा एकेडमी के मेजर मोहित शर्मा हॉल में सारागढ़ी दिवस मनाया। एकेडमी के संचालक ले. कर्नल अमरदीप त्यागी ने सिख रेजीमेंटल सेंटर द्वारा प्रसारित सारागढ़ी युद्ध पर आधारित वृत्तचित्र प्रदर्शित किया और युद्ध का वृतात सुनाया। समारोह के मुख्य अतिथि कर्नल एससी बाली ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सारागढ़ी के वीरों का यह बलिदान सभी योद्धाओं के लिए एक अनुकरणीय दृष्टांत है। सभी छात्र सारागढ़ी के वीरों की वीरता को देखकर व सुनकर उत्साह से रोमाचित हो उठे और मेजर मोहित शर्मा हॉल 'बोले सो निहाल सत श्री अकाल' के नारों से गूंज उठा। समारोह में एके गाधी, एकेडमी के डायरेक्टर ले. कर्नल विजेंद्र राणा, कमाडेंट राजीव शर्मा वह कैप्टन बाबू खान उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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