मेरठ, जेएनएन। Weather Update खुशनुमा मौसम का अहसास कराने वाली ठंड के वर्तमान तेवर अब कहर बन रहे हैं। मौसम की निगाह रखने वाली मौसम एजेंसी ने दिल्ली और मेरठ की ठंड को 119 साल में दूसरा सबसे ठंडा दिसंबर आंका है। शुक्रवार को 14वें दिन भी दिन में लुढ़के तापमान की वजह से हाथ-पांव सुन्न होते महसूस किए गए। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने कहा है कि ठंड का अंतराल 16 से 17 दिन लंबा खिंच सकता है।

1997 के बाद दूसरी बार

मौजूदा समय में दिन के तापमान में रिकार्ड गिरावट चल रही है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 11 डिग्री कम रहा। दिल्ली में दिसंबर का माध्य अधिकतम तापमान 19.15 आंका गया है। वहीं मेरठ में 14 से 27 दिसंबर तक अधिकतम तापमान का माध्य 14.9 आंका गया है। स्काइमेट के मुख्य मौसम वैज्ञानिक महेश पालावत ने बताया कि 1901 से दिसंबर के अधिकतम तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1997 के बाद दिसंबर में दिन के तापमान में इतनी गिरावट दूसरी बार है।

14 दिसंबर से तापमान में गिरावट

अमूमन कड़ाके की ठंड का अंतराल पांच या छह दिन का होता है लेकिन इस बार 14 दिसंबर से लगातार दिन का तापमान सामान्य से 6 से 11 डिग्री नीचे चल रहा है। यह अचंभित करने वाली और क्लाइमेट चेंज के लिहाज से गंभीर स्थिति है। मौसम विभाग ने 30 को हिमालय क्षेत्र में पश्चिम विक्षोभ के आमद की भविष्यवाणी की है जिसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर के साथ पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी और बारिश होगी।

प्रदूषण की चादर जिम्मेदार

एनसीआर और आसपास के शहरों में लगातार कड़ाके की ठंड के कहर के पीछे प्रदूषण की चादर जिम्मेदार है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है। भूमध्य सागर में उत्पन्न हुए पश्चिम विक्षोभ की एक के बाद एक आवाजाही से उत्तर पश्चिम मैदानी भागों में शरीर को सुन्न करने वाली ठंड का प्रकोप बना है। कृषि विवि के मौसम केंद्र के प्रभारी डॉ. यूपी शाही ने बताया कि मौसम विभाग के द्वारा जारी रिपोर्ट में है कि नए साल में ठंड सताएगी।

क्‍या कहते हैं विज्ञानी

दीपावली के बाद से इंडो गैंजेटिक मैदानी क्षेत्र प्रदूषण हावी रहा है। दीपावली के बाद बीच बीच में बारिश या तेज हवा वाले दिनों को छोड़ दें तो लगातार एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के अधिक ही रहा है। कभी-कभी तो यह बेहद गंभीर 400 के बिंदु को पार कर गया। डा. शाही ने बताया कि पुणो स्थित सेंटर फार क्लाइमेट चेंज रिसर्च के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है। वातावरण में जितना ज्यादा स्मॉग और प्रदूषण की धुंध होगी पश्चिम विक्षोभ की तीव्रता उतनी अधिक होती है। रिपोर्ट के अनुसार हिंद महासागर के तापमान में परिवर्तन भी पश्चिम विक्षोभों को बार बार उत्प्रेरित कर रहा है।

लैंड यूज में तेजी से बदलाव भी वजह

पश्चिम विक्षोभ के चलते 13 और 14 दिसंबर माह में मेरठ में रिकार्ड 26.6 मिमी बारिश हुई थी। यह बारिश दिल्ली में भी हुई थी। यह बारिश मध्य उत्तर प्रदेश में हुई थी। लखनऊ में भी दिन का तापमान गिरा हुआ है। शुक्रवार को वहां भी अधिकतम तापमान 11.6 डिग्री रहा। प्रधान मौसम वैज्ञानिक डा. एन सुभाष ने बताया कि लैंड यूज में तेजी से आ रहा बदलाव प्रदूषण को बढ़ा रहा है। जंगल और हरियाली कम हो रही है इसके साथ ग्रीन हाउस गैसें, पीएम 2.5, वाहनों और फैक्टियों से निकलने वाला धुआं बढ़ रहा है। आगामी वर्षो में इस तरह की मौसम आधिक्य स्थितियों का सामना लोगों को करना पड़ेगा।

गुनगुनी धूप के बीच खुला रहा बाजार

20 दिसंबर को हुए बवाल का असर शुक्रवार को बाजार पर कुछ कम रहा। बाजार में दुकानें खुली, लेकिन ग्राहक अपेक्षाकृत कम आए। आम दिनों में व्यस्तम दिखने वाले आबूलेन बाजार खामोशी में सिमटी नजर आई। शोरूम और बड़ी दुकानों पर ग्राहक कम रहे। गुनगुनी धूप और सर्द हवाओं के थपेड़ों के बीच दुकानदार बैठे दिखे। इसमें से एक दुकानदार शादाब ने बताया कि पिछले जुमे के हालात को देखते हुए आज लोगों ने बाजार का रुख कम किया।

Posted By: Prem Bhatt

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