मेरठ, जेएनएन। Weather Update शुक्रवार के बाद शनिवार को भी सुबह की शुरुआत घने कोहरे के साथ हुई। शनिवार को सुबह से ही कोहरा छाया रहा। वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश ठंड के सीजन में परेशानी का सबब बन रही है। बारिश और ओलावृष्टि फसलों पर भी बुरा प्रभाव डाल रही है। ठंड के सीजन में अब तक सामान्य से 10 गुना अधिक बारिश हो चुकी है और आगे भी बारिश के आसार हैं।

बारिश ने बदल दिया ट्रेंड

सितंबर में मानसून की विदाई के बाद नवंबर से ठंड दस्तक देना शुरू कर देती है। मेरठ में पिछले 30 सालों (1981 से 2010 तक) के ट्रेंड को देखें तो ठंड में नाममात्र की बारिश होती है। नवंबर और दिसंबर में तो पांच मिमी से कम और जनवरी में 10.1 मिमी बारिश का औसत है, लेकिन इस बार एक बाद एक पश्चिम विक्षोभ की आमद से मौसम के तेवर बदले हुए हैं। 119 सालों में सबसे लंबा ठंड का अंतराल 14 से 29 दिसंबर तक दिल्ली और मेरठ में दर्ज किया गया है। जनवरी में भी यह सिलसिला जारी है। 17 दिसंबर तक 32.7 मिमी बारिश हो चुकी है। मौसम पर निगाह रखने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट के अनुसार लगातार पश्चिम विक्षोभ के जम्मू कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय होने से बारिश हो रही है।

चलेगी बर्फीली हवा और पड़ेगा कोहरा

पश्चिम विक्षोभ के गुजर जाने के बाद पहाड़ों की बर्फीली हवा मैदानो का रुख करती है। जिससे हाड़ कंपाने वाली ठंड का सामना आने वाले दिनों में जनपद वासियों को करना होगा। हालांकि धूप निकलने से दोपहर में राहत रहेगी। शुक्रवार को अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री कम 17.2 डिग्री रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 11.4 सामान्य से दो डिग्री अधिक रहा। गुरुवार की रात और शुक्रवार को सुबह भी बारिश हुई। 7.8 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। सुबह धूप निकलने के पहले तक कड़ाके की ठंड का सामना लोगों को करना पड़ा। 11.30 बजे तक तापमान 12 और 14.6 डिग्री के बीच बना रहा। धूप निकलने के बाद राहत का अहसास हुआ। कृषि प्रणाली संस्थान के प्रधान मौसम वैज्ञानिक डा. एन सुभाष ने बताया वातावरण में नमी की अधिकतम मात्रा 98 प्रतिशत है, जिससे सुबह के समय कोहरे की आशंका है।

आलू और सरसों के लिए नुकसानदेह

कृषि प्रणाली संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. एम शमीम ने बताया कि बारिश से खेतों में जलभराव हो गया है। जो आलू के लिए नुकसान देह है। ओलावृष्टि से सरसों को भी नुकसान हुआ है। मटर टमाटर और अन्य सब्जियों की पैदावार के लिए बारिश ठीक नहीं है। 19 को भी बूंदाबांदी का आशंका जतायी है। हालांकि गेंहू की फसल को इससे फायदा होगा।

Posted By: Prem Bhatt

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