मेरठ (अनुज शर्मा)। नगर निगम पर दूषित पेयजल आपूर्ति करने और बीमारियां फैलाने का आरोप लगाने वाले शहर के नागरिक जल्द ही पेयजल शुद्धता की कसम खाएंगे। पेयजल की बर्बादी रोकने के ऑनलाइन इंतजाम में जुटा नगर निगम अब शुद्धता पर भी फोकस करेगा। नलकूपों पर ऑटोमेटिक क्लोरीनेटर लगेंगे। पहले चरण में 11 नलकूपों पर उपकरण लगाने की अनुमति और पैसा जल निगम को दे दिया गया है।

130 नलकूपों पर रुकेगी बर्बादी

केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत शहर के सभी पेयजल नलकूपों पर स्काडा सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। इससे एक-एक बूंद तो सुरक्षित रहेगी ही, उसका ऑडिट भी होगा। इस पर खर्च होने वाली राशि केंद, प्रदेश सरकार तथा नगर निगम खर्च करेंगे। जल निगम अफसरों का दावा है कि शहर के 157 में से 130 नलकूपों पर यह सिस्टम स्थापित कर दिया गया। इसके बाद नलकूपों का संचालक ऑटोमेटिक होगा। निगम में स्थापित कंट्रोल रूम से प्रत्येक नलकूप पर नजर रखी जाएगी।

पानी की शुद्धता भी करेंगे सुनिश्चित

स्काडा ऑटोमेशन के साथ अब नगर निगम पेयजल की शुद्धता भी सुनिश्चित करेगा। जल निगम ने प्रत्येक नलकूप पर ऑटोमेटिक क्लोरीनेटर लगाने की योजना बनाई है। एक क्लोरीनेटर 87,000 रुपये खर्च होंगे। 9.57 लाख रुपया प्राप्त होते ही जल निगम ने इसके लिए एजेंसी का चयन करके कार्यआदेश भी जारी कर दिया है। दावा है कि जल्द ऑटोमेटिक क्लोरीनेटर स्थापना का कार्य शुरू हो जाएगा।

खत्म होंगे बीमारियों के कीटाणु

क्लोरीनेटर पानी में उपलब्ध तत्वों की गणना करने के बाद उसकी कमी के आधार पर क्लोरीन की मात्रा मिलाएगा। इससे पानी की शुद्धता सुनिश्चित होगी तथा पानी में मौजूद बीमारियों के कीटाणु भी नष्ट होंगे।

अपर नगर आयुक्त अलीहसन कर्नी का कहना है कि शुद्ध पानी के लिए पूरे शहर में नलकूपों पर क्लोरीनेटर स्थापित कराने का प्रयास है। सबसे पहले 11 नलकूपों के लिए पैसा जारी किया गया है।

एक्सईएन जल निगम यांत्रिक शाखा अमित सहरावत का कहना है कि पानी की एक एक बूंद को सुरक्षित करने के साथ साथ शहर की जनता के स्वास्थ्य के लिए पानी की शुद्धता भी आवश्यक है। इस दिशा में भी काम शुरू हो गया है। जल्द पूरे शहर में निगम के पानी की शुद्धता की लोग कसम खांएगे।

Posted By: Jagran

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