सात फेरों का वचन निभाया: पत्नी ने किडनी दान कर पति को दिया नया जीवन; दर्द पर भारी पड़ा प्यार
Meerut news: बुलंदशहर के सरजीत सिंह को क्रानिक किडनी डिजीज थी, जिससे उनकी जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही ...और पढ़ें

सरजीत सिंह और उमेश देवी।
HighLights
बुलंदशहर निवासी उमेश देवी ने पति को किडनी दान की।
सरजीत सिंह क्रानिक किडनी डिजीज से पीड़ित थे।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सुख-दुख में साथ निभाने और जीवनभर एक-दूसरे की ढाल बनने के सात फेरों के वचन को एक पत्नी ने सच कर दिखाया।
बुलंदशहर के अहमदगढ़ निवासी 54 वर्षीय सरजीत सिंह पिछले दो वर्षों से क्रानिक किडनी डिजीज स्टेज-पांच की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। समय बीतने के साथ उनकी बीमारी एंड-स्टेज रीनल डिजीज में बदल गई, जिससे उन्हें जीवित रहने के लिए नियमित हीमोडायलिसिस पर निर्भर होना पड़ा। हर बीतते दिन के साथ घटती उम्मीदों और डायलिसिस की असह्य पीड़ा के बीच उनकी पत्नी उमेश देवी पति के लिए जीवनदायिनी बन गईं।
जब डाॅक्टरों ने कहा कि सरजीत सिंह की जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है तो उमेश देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी एक किडनी अपने पति को दान करने का निर्णय लिया। जांच के दौरान उनकी किडनी एबीओ-कंपैटिबल (मैचिंग) पाई गई।
इसके बाद मैक्स सेंटर फार आर्गन ट्रांसप्लांट वैशाली में इस संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया की शुरुआत हुई। गुरुवार को मैक्स मेड सेंटर मंगलपांडे नगर में प्रेस वार्ता के दौरान किडनी ट्रांसप्लांट की जानकारी साझा की गई
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल, वैशाली के डाक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने अत्याधुनिक रोबोट-असिस्टेड रीनल ट्रांसप्लांटेशन तकनीक के जरिए इस सर्जरी को अंजाम दिया। पहले पेट में बड़ा चीरा लगता था इसमें छोटे छोटे छेद करके ट्रांसप्लांट किया जाता है।
अस्पताल के यूरोलाजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डाॅक्टर उपवन चौहान, नेफ्रोलाजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर डाॅक्टर विशाल सिंह, सीनियर कंसल्टेंट डाॅक्टर अभिनव कत्याल ने विचार व्यक्त किए।
मुस्कान के साथ नए जीवन की शुरुआत
डॉक्टरों के अनुसार 29 मई को सर्जरी के बाद डाॅक्टरों की सघन निगरानी में दोनों की रिकवरी रही। अपनी एक किडनी दान करने वाली पत्नी उमेश देवी को सर्जरी के महज छह दिनों के भीतर स्वस्थ स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं पति सरजीत सिंह को 15 दिनों के भीतर पूरी तरह स्थिर और सेहतमंद होकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पति-पत्नी का यह अटूट प्रेम और समर्पण समाज के लिए करुणा त्याग तथा पारिवारिक सहयोग की मिसाल है। इस सफल ट्रांसप्लांट ने न केवल सरजीत सिंह को डायलिसिस के दर्द से स्थायी मुक्ति दिलाई बल्कि उनके पूरे परिवार में खुशियों और नई उम्मीदों का सवेरा ला दिया है।
