कहां और कब गिरेगी आकाशीय बिजली... 30 मिनट पहले ही बता देगा ये सेंसर
उत्तर प्रदेश सरकार आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को रोकने के लिए लाइटनिंग अलर्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत कर ...और पढ़ें

कलक्ट्रेट स्थित एनआइसी भवन के ऊपर स्थापित किया गया लाइटनिंग डिटेक्शन सेंसर। जागरण
HighLights
200 किमी तक आकाशीय बिजली की गतिविधि पकड़ेगा सेंसर।
बिजली गिरने के स्थान की 50 मीटर तक सटीकता।
30 मिनट पहले देगा अलर्ट, जान-माल की सुरक्षा।
जागरण संवाददाता, मेरठ। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। जान और माल की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश लाइटनिंग अलर्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत कर रही है। जिसके तहत आइआइटीएम पुणे (इंडियन इंस्टीट्यूट आफ ट्रापिकल मेट्रोलाजी पुणे) की मदद से मेरठ समेत पांच जनपदों में लाइटनिंग डिटेक्शन सेंसर (बिजली गिरने का पूर्वानुमान लगाने वाले सेंसर) स्थापित करा रही है।
मेरठ में यह सेंसर कलक्ट्रेट परिसर स्थित एनआइसी भवन के ऊपर स्थापित कर लिया गया है। शनिवार को इसने काम भी शुरू कर दिया। विशेषज्ञों का दावा है कि यह सेंटर अपने चारो ओर 200 किमी यानि कुल 400 किमी की दूरी तक आकाशीय बिजली की गतिविधियों को तुरंत पकड़ लेगा। बिजली गिरने के स्थान की 20 से 50 मीटर तक की सटीकता से 30 मिनट पहले ही जानकारी दे देगा। जिसके आधार पर स्थानीय लोगों को अलर्ट जारी करके बचाया जा सकेगा।
आइआइटीएम पुणे के इंजीनियर जयश धांगर ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अभी तक कुल सात सेंसर काम कर रहे हैं। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं लगातार हो रही हैं और उनसे जान माल की हानि जारी है। बिजली गिरने के स्थान की सटीकता से समय रहते सूचना प्राप्त करने के लिए पांच नए जनपदों में ये लाइटनिंग डिटेक्शन सेंसर स्थापित किए जा रहे हैं। एटा, लखीपुर खीरी, बलरामपुर और सोनभद्र में भी इनकी स्थापना का कार्य चल रहा है।
जयश के मुताबिक यह सेंसर टाइम आफ अराइवल आधारित तकनीक पर काम करता है।नए सेंसर स्थापित होने के बाद उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली की सटीकता से जानकारी मिल सकेगी। जनपद के आपदा राहत अधिकारी एडीएम वित्त वीरेंद्र मौर्य ने बताया कि राहत आयुक्त के आदेश पर यह सेंसर एनआइसी भवन के ऊपर स्थापित कराया गया है।
लाइटनिंग डिटेक्शन सेंसर की विशेषताएं
- यह सटीक प्रणाली केंद्र से चारो ओर 200 किमी की दूरी तक की गतिविधियों को पकड़कर अलर्ट जारी करती है।
- बिजली गिरने के स्थान की 50 मीटर से 20 मीटर तक की सटीकता से जानकारी।
- बादलों के बीच पैदा होने वाली बिजली और बादलों से जमीन पर गिरने वाली दोनों प्रकार की बिजली को डिटेक्ट करते हैं।
- बिजली गिरने से 30 मिनट पहले इसकी सूचना देने में सक्षम हैं।
कैसे काम करता है
यह अत्याधुनिक प्रणाली टाइम आफ अराइवल (टीओए) तकनीक पर काम करती है।आसमान में जब वज्रपात की स्थिति बनती है, तो बादलों के आपसी घर्षण से विद्युत-चुंबकीय तरंगें पैदा होती हैं। ये सेंसर बादलों के बीच की हलचल को ही पकड़ लेते हैं। रेडियो तरंगों के सेंसर तक पहुंचने के समय को नैनोसेकंड की सटीकता के साथ मापा जाता है। यह डेटा तुरंत आइआइटीएम पुणे के केंद्रीय सर्वर तक पहुंच जाता है।
