मुजफ्फरनगर, दिलशाद सैफी। विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। सियासी दलों के मोहरे और चेहरे साफ हो गए हैं। खतौली विधानसभा सीट को वजूद में आए आधी सदी से अधिक समय हो चुका। हर चुनाव में सरकार बनाने में आधी आबादी का पूरा योगदान रहा है, लेकिन टिकट से लेकर विधानसभा की दहलीज तक पहुंचने की उनकी हसरत अधूरी है। विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने टिकट को लेकर महिलाओं पर भरोसा नहीं जताया है। सपा-रालोद गठबंधन, भाजपा और बसपा अपने चेहरे दिखा चुकी हैं, जबकि कांग्रेस का इंतजार चल रहा है।

खतौली विधानसभा सीट पर रोमांचक मुकाबले सामने आए हैं। कांग्रेस, बीकेडी के साथ जनता दल ने यहां दबदबा दिखाया है, लेकिन परिसीमन के बाद यहां बदले समीकरणों के चलते किसी एक दल का कब्जा नहीं हो सका। इस बार भाजपा के लिए इतिहास दोहराने तथा गठबंधन समेत अन्य दलों के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। यहां कोई मजबूत महिला चेहरा नहीं उभर सका है, जिससे महिला राजनीति का सूरज भी उदय नहीं हो पाया। खतौली विधानसभा 1967 में वजूद में आई थी। 55 वर्ष बीत गए मगर कोई महिला यहां से विधायक नहीं बन सकी है।

सरकार बनाने में योगदान, माननीय नहीं बनीं

विधानसभा क्षेत्र में 180 से अधिक गांवों के मतदाता अपने विधायक का चुनाव करते हैं। इस बार युवाओं के साथ आधी आबादी की संख्या भी बढ़ी है। यहां कुल मतदाता तीन लाख 16 हजार से अधिक हैं, जिनमें महिला मतदाता लगभग डेढ़ लाख हैं। महिलाएं अपने विधायक का चुनाव तो कर रही हैं लेकिन कभी स्वयं उन्हें माननीय बनने का सौभाग्य नहीं मिल सका।

अब तक के विजेता

वर्ष विजेता प्रत्याशी

1967 एस. सिंह (कांग्रेस)

1969 वीरेंद्र वर्मा (बीकेडी)

1974 लक्ष्मण सिंह (बीकेडी)

1977 लक्ष्मण सिंह (जेएनपी)

1980 धर्मवीर सिंह (कांग्रेस)

1985 हरेंद्र सिंह (एलकेडी)

1989 हरेंद्र सिंह (जेडी)

1991 सुधीर बालियान (बीजेपी)

1996 राजपाल बालियान (बीकेकेपी)

2002 राजपाल बालियान (आरएलडी)

2007 योगराज सिंह (बसपा)

2012 करतार सिंह भड़ाना (रालोद)

2017 विक्रम सिंह सैनी (बीजेपी)

Edited By: Taruna Tayal