सहारनपुर, जागरण संवाददाता। दो साल पहले आजाद समाज पार्टी का गठन कर राजनीति में आए चंद्रशेखर आजाद साल 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच हुई हिंंसा के दौरान भीम आर्मी प्रमुख के तौर पर चर्चाओं में आए थे। चंद्रशेखर इस संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। शनिवार को एक बार फिर लखनऊ में सपा पर दिए गए बयान को लेकर चंद्रशेखर चर्चाओं में आ गए।

पेशे से वकील हैं चंद्रशेखर

पेशे से वकील चंद्रशेखर ने 2011 में कुछ युवाओं के साथ मिलकर भारत एकता मिशन भीम आर्मी का गठन किया। भीम आर्मी अब दलित युवाओं का संगठन बन गया है। चंद्रशेखर बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता से उनके जीवन के अंतिम क्षणों में दलित समाज को देश का शासक बनाने का वायदा किया था। इस वादे को पूरा करने के उद्देश्य से उन्होंने 2015 में सतीश रावत और विनयरत्न के साथ भीम आर्मी का गठन किया और वह फेसबुक के माध्यम से दलितों व पिछड़ों को संगठन से जोड़ते चले गए।

दिल्ली के जंतर मंतर पर कराया था ताकत का अहसास

कुछ समय में उनके संगठन का आसपास के जनपदों में भी विस्तार हो गया। उन्होंने तुगलकाबाद में रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर भीड़ जुटा कर संगठन की ताकत का अहसास भी कराया।

2020 में आजाद समाज पार्टी का गठन किया

शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा से वह और उनका संगठन भीम आर्मी सुर्खियों में आए। इस दौरान उनको जेल भेजा गया। जेल से रिहाई भी रात के अंधेरे में की गई थी। मार्च 2020 में उन्होंने आजाद समाज पार्टी का गठन किया और राजनीति के अखाड़े में कूद पड़े। उनके पिता गोर्धनदास मूलरूप से हरिद्वार के डाडा गांव के रहने वाले थे। प्राइमरी स्कूल में अध्यापक रहते उन्होंने सहारनपुर के छुटमलपुर कस्बे को अपना स्थायी निवास बना लिया था। गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध गोर्धनदास क्षेत्रीय राजनीति के माहिर माने जाते थे। चंद्रशेखर के परिवार में मां कमलेशदेवी के अलावा बड़े भाई भगत सिंह, छोटे भाई कमल किशोर हैं, जो खेती करते हैं। उनके तीन बहने हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। एलएलबी डिग्री धारक चंद्रशेखर आजाद की अभी शादी नहीं हुई है। गत वर्ष जब वह बीमार पड़े थे और मेरठ के अस्पताल में भर्ती थे तब उनकी कुशलक्षेम पूछने के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा अस्पताल आईं थीं।

 

Edited By: Parveen Vashishta