मेरठ । वाह..अद्भुत कमाल कर दिया। नाजुक दिखने वाली छात्राओं ने जब गले से सरिये को मोड़ा, सिर से ट्यूबलाइट को चकनाचूर किया तो देखने वाले लोग दंग रह गए। शनिवार को चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओर से आयोजित सात दिवसीय व्यास समारोह में यह दृश्य दिखा। बृहस्पति भवन और उससे बाहर छात्र- छात्राओं ने यौगिक बल प्रदर्शन किया।

व्यास समारोह में दूसरे दिन तीसरे सत्र में शाम को यौगिक बल प्रदर्शन किया गया। डा. राजवीर के निर्देशन में संस्कृत के छात्र छात्राओं ने ताड़ासन, ध्रुवासन, त्रिकोणासन, हनुमान आसन, भैरवासन, भुजंगासन, चक्रासन, उत्तालासन, हलासन, शीर्षासन जैसे कठिन आसनों को करके दिखाया। छात्र छात्रओं ने गले से लोहे की सरिया को मोड़ा, सीने पर ईट और पत्थर को रखकर हथौड़ा मारकर तोड़ा। ट्यूबलाइट को सिर और चेहरे से चकनाचूर कर दिया।

'दूसरों पर दोष मढ़ना ठीक नहीं'

व्यास समारोह में पहले सत्र में वाद- विवाद प्रतियोगिता हुई। विषय 'स्वयं को अच्छी तरह से जानना चाहिए, दूसरों पर दोषारोपण ठीक नहीं है,' रहा। पक्ष में संध्या ने कहा कि जो व्यक्ति दूसरे के दोषों को देखता है वह कभी गुणवान नहीं हो सकता है। आज सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम अपने दोष पर ध्यान नहीं देते हैं दूसरों को दोषी ठहरा देते हैं। विपक्ष में बोलते हुए आयुषी ने कहा कि अगर हम केवल अपने दोषों को देखते रहेंगे तो हीन भावना से ग्रस्त हो सकते हैं। मुख्य अतिथि डा. भारतेंदु पांडे ने कहा कि कहा कि दूसरों में दोष नहीं देखना चाहिए। वाद विवाद में आरजी पीजी कालेज की एमए की छात्रा संध्या प्रथम रही। दूसरे स्थान पर आरजी की आयुषी और तीसरे स्थान पर चौ. चरण सिंह विवि के एमए के छात्र प्रदीप रहे। चलवैजयंती की विजेता टीम भी आरजी कालेज रही।

शोध संगोष्ठी में पदम पुराण पर चर्चा

व्यास समारोह के एक अन्य सत्र में संस्कृत के विद्वानों ने पदम पुराण पर चर्चा की। डा. संतोष कुमारी और पारुल मित्तल ने इस पर प्रकाश डाला। समारोह के चौथे सत्र में छात्र छात्राओं ने संस्कृत में कविता पाठ किया। कार्यक्रम में डा. पूनम लखनपाल, डा. राजवीर, डा. संतोष कुमारी, डा. नरेंद्र तेवतिया, अंजलि त्यागी, राहुल, अंकुर आदि का सहयोग रहा।

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