मेरठ, [विवेक राव]। संग्रहालय अपने आप में खास होते हैं। ये हमारी ऐतिहासिक,सांस्कृतिक व सामाजिक विरासत सहजते हैं। संस्कृति व समाज की तस्वीर भी दिखाते हैं। शहर के कई डिग्री कॉलेजों में कुछ ऐसे संग्रहालय हैं,जो अपने में पूरा इतिहास समेटे हुए हैं। वहीं कुछ संग्रहालय चिड़ियाघर की तलाश भी पूरी करते हैं। इन संग्रहालयों की खासियत लोगों को अपने करीब खींच लाती है। हर साल हम 18 मई को विश्व संग्रहालय दिवस मनाते हैं। इस दिवस पर चलिए हम आपको शहर के कुछ संग्रहालयों की सैर कराते हैं..
चिड़ियाघर से कम नहीं यह म्यूजियम
मेरठ कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग में बना म्यूजियम किसी चिड़िया घर से कम नहीं है। यह दूसरी बात है कि इन जीवों में जान नहीं है,लेकिन इन्हें देखकर भी लोगों को एक रोमांच का अनुभव होता है। प्रदेश में अपने तरीके का यह अकेला म्यूजियम है। पशु-पक्षियों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए यहां कई चीजें उपलब्ध हैं। दो मुंह के बच्चे का भ्रूण, घोड़े, चूहे, सूअर, भैंस, बंदर, गाय व कुत्ते जैसे कई जानवरों के भ्रूण यहां पर संग्रहित किए गए हैं। टाइगर व लेपर्ड के बेशकीमती दांत, कोबरा और नेवले की लड़ाई, लुप्त प्राय हो चुके शुतुरमुर्ग के अंडे और मानव से लेकर कई जानवरों के कंकाल भी यहां देखने को मिल जाएगा। 1936 में इस संग्रहालय की शुरुआत हुई थी, जिसे आधुनिक रूप दिया गया है। शिक्षक डॉ. नीरज का कहना है कि म्यूजियम में कंप्यूटर कियोस्क से पूरी जानकारी मिल सकती है।

यहां राष्ट्रीय संग्रहालय का अनुभव
अगर आप नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में नहीं जा सकते हैं तो मेरठ में एनएएस डिग्री कॉलेज के म्यूजियम में इसका अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। मेरठ में एक मात्र म्यूजियम है, जो राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली से संबद्ध है। नई दिल्ली से इस म्यूजियम को हड़प्पा, नवपाषाण, मौर्यकाल, कुषाण, गुप्त, राजपूत काल की कई प्रतिकृतियां मिली हैं, जिसे म्यूजियम में संग्रहित किया गया है।
बेजान नहीं ये पत्थर
मेरठ कॉलेज के म्यूजियम में रखे पत्थरों में पूरा इतिहास छिपा है। म्यूजियम में खजुराहो की झलक देखने को मिल जाएगी। इसके अलावा करीब 126 साल पुराने मेरठ कालेज में करीब 1100 साल पुराना ऐतिहासिक शिलापट है, जिस पर नौवीं शताब्दी के गुर्जर-प्रतिहार वंश का उल्लेख है। म्यूजियम में करीब एक हजार साल पहले की राजपूतों का वैभव दर्शाती प्रतिमाएं हैं। इसमें से कई पत्थर हड़प्पाकालीन है। अशोक की लाट भी है यहां। मेरठ कॉलेज के म्यूजियम में गुप्तकाल,मुगल काल से लेकर क्वीन विक्टोरिया के काल के सिक्के भी संग्रहित किए गए हैं। दूसरी शताब्दी को बताने वाली कई प्रतिमाएं संग्रहीत हैं। 

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Posted By: Ashu Singh

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