मेरठ, जेएनएन। 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस है। कोरोना वायरस की महामारी के चलते इस दिवस पर पहली बार मेरठ के रंगमंच सूने रहेंगे। हालांकि कुछ रंगकर्मियों ने इस दिवस पर नाटक मंचन करने को लेकर लगातार रिहर्सल भी करते रहे थे। ऐसे समय में रंगमंच के कलाकार अभिनय नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन वे अपने अध्ययन को जारी रखे हुए हैं, ताकि मंच पर जब भी मौका मिले वे अपने अभिनय का रंग दर्शकों पर बिखेर सकें।

शहर में उप्टा, इप्टा, मुक्ताकाश, दर्पण कला केंद्र जैसी नाट्य संस्थाएं हैं। भारतभूषण, शांति वर्मा, हरिप्रकाश होलट, अनिल शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, विनोद बैचेन, हेमंत गोयल जैसे रंगकर्मी आज भी मेरठ में रंगकर्म को जिदा रखे हैं। मेरठ के रंगमंच के सामने चुनौतियां पहले से ही कम नहीं है। कई रंगकर्मी इस शहर से निकले। कई नाट्य संस्थाएं हैं, लेकिन नाट्य मंचन के लिए एक अदद आडिटोरियम तक नहीं है। जहां स्टेज और साउंड व्यवस्था हो सके। यूनाईटेड प्रोग्रेसिव थियेटर एसोसिएशन(उप्टा) के अध्यक्ष रंगकर्मी भारत भूषण शर्मा बताते हैं कि शहर में 'जिसने लाहौर नहीं देख्या' व 'रक्त अभिषेक' जैसे चर्चित नाटक हो चुके हैं। गिरीश कर्नाड, नसीरुद्दीन शाह, ओमपुरी जैसे दिग्गज रंगकर्मी भी मेरठ आ चुके हैं। बड़े पर्दे पर भी चमके साई बाबा का किरदार निभाने वाले मुकुल नाग, सीरियल में राजा का किरदार निभाने वाले वेद थापर, गिरीश थापर, उतरन जैसे धारावाहिक से जुड़े पवन निबेकर कभी मेरठ में स्टेज पर अभिनय करते थे। अब बड़े पर्दे पर हैं। आज भी मेरठ मेरठ में रंगकर्मियों के लिए प्राथमिक सुविधाएं नहीं हैं। इसके लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन सरकारी स्तर से हर बार निराशा ही मिली।

रंगमंच की ओर रुझान कम होने को लेकर भारत भूषण कहते हैं कि मेरठ में रंगमंच के सामने चुनौती कम नहीं हैं। युवा बहुत जल्दी यहां से निकल कर बड़े पर्दे पर चमकना चाहते हैं। स्कूल कॉलेज स्तर पर भी कम छात्र थियेटर को अपना करियर बनाना चाहते हैं। इससे रंगमंच में सीखने और कुछ अलग करने की प्रवृत्ति कम हो रही है। नाटकों का स्वरूप भी बदल रहा है। नाटकों के माध्यम से समाज को कई संदेश भी दिया जा सकता है।

अभिनय पर कोरोना इफेक्ट

नाटक में एक रंगकर्मी के अभिनय को दर्शक सीधे देखते हैं। इसलिए मेरठ के ज्यादातर रंगकर्मी स्टेज शो को ऑनलाइन नहीं करते हैं। उप्टा के अध्यक्ष भारत भूषण बताते हैं कि अब उनके एसोसिएशन के कई लोग यूट्यूब और आनलाइन भी शो की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल सभी को पीडीएफ स्टेारी भेजी जा रही है। जिसे वे पढ़ रहे हैं, लेकिन अभिनय का असली मजा लाइव स्टेज पर देखने में ही है। इसलिए वे आनलाइन को बढ़ावा नहीं देना चाहते हैं। यह एक विकल्प बस होगा।

Posted By: Jagran

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