मेरठ, जेएनएन। माना कि वेस्टर्न म्यूजिक ओर डांस युवाओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन आत्मीय शांति की जहां तक बात है तो वह आज भी शास्त्रीय संगीत और नृत्य में ही है। यहीं कारण है कि आज की युवा पीढ़ी फिर से भारतीय शास्त्रीय संगीत की ओर मुड़ रही है। इसका अभ्यास यदि बचपन से ही किया जाए तो संगीत में नृत्य और गायन की ऐसी कोई विद्या नहीं है जिसे समझा न जा सकें। वर्तमान में माता-पिता छोटे बच्चों को भी इस विद्या का ज्ञान देना चाहते हैं। यहीं कारण है कि शास्त्रीय नृत्य व संगीत विद्यालयों में तीन साल से लेकर तीस साल तक के लोग आ रहे हैं।

कथक गुरु रूचि बलूनी का कहना है कि बच्चों में शास्त्रीय संगीत के प्रति रुझान बढ़ रहा है। पिछले कुछ सालों में रियलिटी शो का क्रेज बच्चों और युवाओं में बढ़ा है। इससे बच्चों और माता-पिता को शास्त्रीय संगीत का महत्व पता चला है। हम बच्चों को न सिर्फ शास्त्रीय नृत्य और गायन की शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि मेकअप, घुंघरू बनाना, गुरु पूजा, सरस्वती पूजा, वाद्य पूजा और यहां तक कि कॉस्ट्यूम डिजाइन करना भी सिखाते हैं। जिससे बच्चे आत्मनिर्भर बन सकें।

कथक में मिला युवा पुरस्कार

संगीत नाटक अकादमी से युवा कथक नृत्यांगना का पुरस्कार जीत चुकी इपसा नरूला तीस साल की उम्र से कथक विद्या की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, और अब वह कथक में ही पोस्ट ग्रेजूएशन कर रही है। इपसा बताती है कि वह कथक में ही अपनी करियर बनाना चाहती हैं। यह नृत्य शैली की आत्मा है और इसे करने के बाद सभी नृत्य कलाओं के बेसिक क्लीयर हो जाते हैं।

देश विदेश में बनाई पहचान

कथक में एम फिल कर रही सुमेधा गुप्ता जब चार साल की थी तभी उन्होंने कथक की शिक्षा प्रारंभ की। वह आज न सिर्फ देश विदेश में अपनी पहचान बना चुकी हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी शास्त्रीय संगीत के बारे में जानकारी देती हैं। सुमेधा विरजू महाराज की वर्कशॉप में भी कई बार भाग ले चुकी है। उनका कहना है कि शास्त्रीय संगीत को संगीत की आत्मा कहना गलत न होगा। इससे आत्मीय शांति का आभास होता है।

इन्होंने कहा..

अक्सर रियलिटी शो में एक दो पायदान आगे बढ़ने के बाद युवा आगे नहीं बढ़ पाते हैं। लेकिन शास्त्रीय संगीत के युवा कलाकारों को गायन और नृत्य के बेसिक क्लीयर होते हैं और उनके लिए कोई भी मुश्किल नहीं होती है। यहीं कारण कि तीन-चार साल के बच्चे भी अब बड़ी संख्या में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

-राजा बलूनी, प्रधानाचार्य, शिवांगी संगीत महाविद्यालय

Posted By: Jagran

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