शामली, जागरण संवाददाता। शामली जनपद की मूल निवासी मोनिका शर्मा ने विदेशी फलक पर शानदार उपलब्धि हासिल की है। उनका उपन्यास अस्तित्व की तलाश में सिमरन ने न केवल शोहरत बटोरी है, बल्कि चीन के विश्‍वविद्यालय ने इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। चीन के विवि ने मोनिका शर्मा को पत्र लिखकर इस उपन्यास को विवि में पढ़ाए जाने के लिए लिखित अनुमति देने का अनुरोध किया है। इस संबंध में विवि ने मोनिका शर्मा को पत्र लिखा है। मोनिका शर्मा का कहना है कि जल्द ही औपचारिकताएं पूरी कर पत्र भेज दिया जाएगा।

शामली जनपद के थानाभवन क्षेत्र के गांव कादरगढ़ गांव की मूल निवासी मोनिका शर्मा ने वर्ष 2019 में अस्तित्व की तलाश में सिमरन उपन्यास लिखा था। मूलरूप से यह उपन्यास सिमरन के संघर्षों और दर्द की कहानी है। कैसे वह अपने अस्तित्व की तलाश करती है और फिर वह अपने संघर्षों के बल पर मुकाम हासिल करती है। वर्तमान में वह मुंबई में अपना एनजीओ चलाती है। इस उपन्यास का प्रकाशन वर्ष 2019 में हुआ था। प्रकाशन के बाद कई देशों के लोगों ने इस उपन्यास की तारीफ की। इसके बाद चीन के विवि ने इसे पाठयक्रम में पढ़ाने का निर्णय लिया।

चीन के गंगतोंग विश्वविद्यालय के विदेशी भाषा के हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर विवेक मणि त्रिपाठी ने मोनिका शर्मा को भेजे पत्र में कहा है कि स्नातक के चौथे वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए आपके उपन्यास को पाठयक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि विवि के पाठ्यक्रम में उपन्यास को शामिल करने के लिए आपकी अनुमति आवश्यक है। इसलिए अनुमति देने की कृपा करें।

इनका कहना है

चीन के विवि से पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने लिखित अनुमति मांगी है। अनुमति भेज दी जाएगी। उनका एक मात्र लक्ष्य ङ्क्षहदी की सेवा करते हुए ङ्क्षहदी उत्थान के लिए कार्य करना है।

मोनिका शर्मा, उपन्यास लेखिका

 

Edited By: Taruna Tayal