मेरठ, जेएनएन। मेरठ की भूमि को हराभरा बनते देखने की उम्मीद रखने वाले प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। देशव्यापी स्तर पर वन क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को लेकर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया की द्विवार्षिक रिपोर्ट में मेरठ के वन क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रिपोर्ट में मेरठ के कुल भू-भाग का 2.67 प्रतिशत हिस्सा ही वनाच्छादित है। जबकि राष्ट्रीय वन नीति में कुल भौगोलिक क्षेत्र के 33 प्रतिशत हिस्से को हरा-भरा बनाने का लक्ष्य है। हालांकि डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि जनपद में ट्री कवर (पेड़ों का आवरण) जरूर बढ़ा है।

जनपद में वन क्षेत्र के बढ़ाने के लिए हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं। साल 2021 में भी वन विभाग के अलावा ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि समेत अन्य विभागों की मदद से करीब 30 लाख पौधे लगाए गए। जिले के वन क्षेत्र में कोई परिवर्तन न होना यह दर्शाता है कि साल दर साल प्रशासन पौधारोपण का लक्ष्य तो बढ़ाता लेकिन उन पौधे के संरक्षण को लेकर सार्थक प्रयास नहीं हो रहे हैं। डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि फारेस्ट सर्वे आफ इंडिया (एफएसआइ) द्वारा तैयार इंडिया स्टेट आफ फारेस्ट रिपोर्ट-2021 में जनपद के फारेस्ट कवर (वनावरण) से जुड़ा वर्ष 2019 तक का डाटा लिया गया है। सैटेलाइट सर्वे में कई बार छोटे-छोटे ब्लाकों में लगे पेड़ या हरियाली नहीं आ पाते। इसी तरह हाल ही में लगे पौधे और छोटे-छोटे पौधे भी कई बार नहीं प्रदर्शित हो पाते। जिसके कारण सर्वे में एकदम सटीक डाटा नहीं आ पता। पौधारोपण अभियान के कारण जिले में ट्री कवर यानी पेड़ों के आवरण की स्थिति सुधर रही है। ट्री आउट साइड फारेस्ट भी बढ़ रहा है। जिसमें ब्लाकों के रूप में हरियाली होती है। साथ ही सड़कों के किनारे, नहर के तट, घरों और शहरी क्षेत्र में बिखरे पेड़ शामिल हैं। मेरठ का वन क्षेत्र (एफएसआइ की रिपोर्ट-2021 अनुसार)

कुल भू-भाग, 2559 वर्ग किमी

अति घना वन क्षेत्र, 00 वर्ग किमी

मध्यम घना वन क्षेत्र, 34 वर्ग किमी

खुला वन क्षेत्र, 34.41 वर्ग किमी

कुल वन क्षेत्र, 68.41 वर्ग किमी

कुल भू-भाग में वन क्षेत्र (प्रतिशत में)

गत रिपोर्ट से परिवर्तन (2019), 0

Edited By: Jagran