मेरठ, जेएनएन। बेसिक शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार, शिक्षकों की वेतन विसंगति आदि की समस्याओं को लेकर जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की अगुवाई में सैकड़ों शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन किया। धरने को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री डॉ छोटूराम ने कहा कि शिक्षकों से हर प्रकार की डयूटी कराई जाती है। हर विभाग में शिक्षक सहयोग देता है। कोरोना काल में लगातार स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवा दे रहे हैं। उसके बावजूद उनके वेतन के साथ खिलवाड़ किया जाता है। शिक्षकों के वेतन को कम कर दिया गया। उच्च न्यायालय का आदेश भी अधिकारी नहीं मान रहे हैं। एक ही नियुक्ति तिथि के शिक्षकों के वेतन में भारी विसंगति है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ  इन सब विसंगतियों को लगातार दो वर्षों से उठा रहा है। किन्तु अधिकारियों द्वारा सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। समस्याएं जहां की तहां है।

इन बिंदुओं से जाने क्‍या है मांगे 

  •  सर्वप्रथम शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने को दिया गया धरना।
  •  धरने के दौरान ही बेसिक शिक्षा अधिकारी का वेतन विसंगति दूर करने और शिक्षकों की अन्य समस्याओं का समाधान आठ दिन में करने का पत्र धरना स्थल पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ को  खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री चरण सिंह ने रिसीव कराया और दिया आश्वासन
  •  राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलामहामंत्री डॉ छोटू राम ने धरना स्थगित करने से पहले दी चेतावनी-"यदि आठ दिन में शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बेसिक शिक्षा कार्यालय में करेगा अनिश्चितकालीन आमरण अनशन।"
  • राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आग्रह पर धरने में शामिल शिक्षकों का एक दिवसीय सामुहिक अवकाश को भी बेसिक शिक्षा अधिकारी  द्वारा स्वीकृत करने का दिया आश्वासन
  • धरना स्थगन के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर संघ की जिलाकार्यकारणी के तत्वावधान में जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से मुख्यमंत्री को शिक्षकों ने दिया 10 सूत्री मांग पत्र
डॉ  राम ने कहा कि यह धरना विशाल आंदोलन का आगाज है। अगर शिक्षकों की वेतन विसंगतियों को आठ दी  में  दूर नहीं किया गया तो शिक्षक बेसिक शिक्षा कार्यालय में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और आंदोलन करेंगे और इसके लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी और वित्त लेखा अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

जिला अध्यक्ष विकेश ठाकुर ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक एक ईमानदार कौम है। राष्ट्र निर्माता है। आज राष्ट्र के निर्माता को इतना कमजोर कर दिया गया है कि मजबूर हो कर उसे धरना देना पड़ रहा है। शिक्षक केवल अपने वेतन में ही संतुष्ट रहता है, किंतु उसके वेतन को भी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नियम विरुद्ध  कम कर दिया है। यह अत्याचार हम सहन नहीं करेंगे। लड़ाई जारी रहेगी।

जिला कोषाध्यक्ष विनय चहल ने कहा कि अब शिक्षक हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठेगा। बेसिक शिक्षा कार्यालय में हो रहे अत्याचार के विरुद्ध शिक्षक सड़क पर आएंगे। जिला उपाध्यक्ष विकेश चौधरी ने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राष्ट्र हित में सदैव तत्पर रहता है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ही अनुसांगिक संघ है जो कि निस्वार्थ भाव से शिक्षकों की समस्या समाधान हेतु तत्पर रहता है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ही ऐसा संघ है जो शिक्षकों की समस्याओं का समाधान कर सकता है।

 माछरा ब्लॉक अध्यक्ष मंजूलता ने कहा कि बेसिक शिक्षा कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर शिक्षकों का वेतन शासन से नही बेसिक शिक्षा कार्यालय से निर्धारित हो रहा है। मनमर्जी से शिक्षकों के वेतन का निर्धारण हो रहा है। जिससे एक ही तिथि को नियुक्त शिक्षकों के वेतन में आपस में भारी विसंगति पैदा हो गई है। इसकी जाँच होनी चाहिए और जो भी इस कुकृत्य में शामिल है उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अन्य शिक्षकों ने भी वेतन विसंगति को लेकर अपने विचार रखें।

बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से खंड शिक्षा अधिकारी चरण सिंह ने शिक्षकों की वेतन सम्बन्धी और अन्य समस्याओं को आठ दिन के अंदर समाधान करने का बेसिक शिक्षा अधिकारी का पत्र राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ को सौंपा और भरोसा दिलाया सभी समस्याओं को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों को बुलाकर समाप्त कर दिया जायेगा।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने चरण सिंह से बताया कि सभी शिक्षक एक दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर आये हैं इसलिए धरने में शमिल शिक्षकों को एक दिन का विशेष अवकाश घोषित किया जाए जिसको उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।जिसके बाद राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के आश्वासन के बाद धरना स्थगित कर दिया।

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