बिजनौर, जागरण संवाददाता। एनआइए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या में भले ही मुनीर को फांसी की सजा सुना दी गई, लेकिन इसके अलावा कई अन्य संगीन अपराधों के आरोपित मुनीर अहमद को कमजोर पैरवी होने से सजा नहीं मिल पा रही है। खाकी को भी इंसाफ नहीं मिल पाया है। अनुमान है कि इन सभी केसों में अभी तक पेशी में करोड़ों का खर्च आ चुका है। 

अलीगढ़, लखनऊ और दिल्ली में दर्ज हैं संगीन मामले

दो अप्रैल 2016 को एनआइए अफसर तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या में मुनीर अहमद को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। एक माह पूर्व गैंगस्टर में भी सजा हुई थी। इसके अलावा उस पर अलीगढ़, लखनऊ और दिल्ली में संगीन अपराध के मामले दर्ज हैं। अलीगढ़ में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या कर पिस्टल लूट और लखनऊ में जज के गनर को गोली मारकर सर्विस रिवाल्वर लूट की घटना भी हुई। यह अपराध वर्ष 2013 और 2014 में हुए हैं। सभी केस अंडर ट्रायल हैं। पुलिस की लेटलतीफी की वजह से अदालत में गवाही और ट्रायल धीमा चल रहा है। इस वजह से पीड़ितों को नौ साल से इंसाफ का इंतजार है। बताया जा रहा है कि अलीगढ़ और दिल्ली के कुछ केस में चार्ज भी नहीं हुआ है। हर पेशी पर आता है, लाखों खर्च

शातिर मुनीर को दूरस्थ जेलों में रखा गया है। पहले वह तिहाड़ जेल में रहा। फिर कुछ समय बिजनौर जेल में रहा। बिजनौर जेल प्रशासन ने असुरक्षित मानते हुए उसे रखने से इन्कार कर दिया। फिर उसे सोनभद्र जेल भेज दिया गया। हर पेशी पर लाने पर लाखों रुपये खर्च होते हैं। दो गाड़ियों में 10-15 पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाई जाती है। पेशी के दौरान अदालत में कड़ी सुरक्षा की जाती है। यहां पर भी 30-40 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगती है। यही हालत अन्य जिलों में पेशी की है। अनुमान है कि अब तक करोड़ों का खर्च आ चुका है।

मुनीर की जिलेवार अपराध की सूची

जिला : केस

बिजनौर : आठ

अलीगढ़ : 18

नोएडा : दो

लखनऊ : दो

दिल्ली : छह

इन्‍होंने कहा

मुनीर पर दर्ज सभी केसों में पहली सजा गैंगस्टर में हुई थी। एनआइए अफसर की हत्या में फांसी की सजा हो चुकी है। बैंक लूट में केस के ट्रायल की निगरानी की जा रही है। मानीटरिंग सेल और संबंधित थाना पुलिस को गवाहों को जल्द पेश करने के लिए कहा गया है। सरकारी वकील से लगातार संपर्क है।

-डा. धर्मवीर सिंह, एसपी

 

Edited By: Parveen Vashishta