बिजनौर, बिरेंद्र देशवाल। इसे एक खूंखार अपराधी का खौफ कहें या फिर झंझट से बचने का तरीका। शातिर मुनीर को डेढ़ घंटे तक जेल के बाहर खड़े रखने की घटना ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि डीजी जेल और एडीजी कानून व्यवस्था के दखल के बाद जिला कारागार प्रशासन ने मुनीर को जेल में दाखिल किया था।

इस कारण फंस गया पेच

स्योहारा थाना क्षेत्र के सहसपुर निवासी एनआइए अधिकारी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में शुक्रवार को सोनभद्र जेल से सहसपुर निवासी शातिर मुनीर को कड़ी सुरक्षा में बिजनौर कोर्ट लाया गया था। शुक्रवार को ही कोर्ट ने मुनीर और रैयान को दोषी माना और सजा शनिवार को सजा सुनाने का समय तय किया। कोर्ट ने मुनीर को दो दिन के लिए जिला कारागार, बिजनौर में रखने का आदेश भी दिया था। शुक्रवार शाम साढ़े चार बजे सीओ सिटी, शहर कोतवाल और सोनभद्र पुलिस मुनीर को जिला कारागार में दाखिल करने के लिए पहुंची, तभी मुनीर को जेल में दाखिल करने को लेकर पेच फंस गया। जेल प्रशासन ने नियम और सुरक्षा के कारणों का हवाला देते हुए उसे यहां रखने से इन्कार कर दिया।

जिला कारागार में रखने को लेकर शुरू हुई खींचतान

चूंकि, मामला प्रदेश के टाप टेन अपराधी का था। इसलिए मुनीर को जिला कारागार में रखने को लेकर खींचतान शुरू हो गई। इस संबंध में डीआइजी जेल से बात की गई तो उन्होंने भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इधर, शातिर मुनीर को जेल के गेट के बाहर लिए खड़े पुलिस अधिकारियों के हाथ पैर फूलने लगे। इसके बाद एसपी डा. धर्मवीर सिंह ने डीजी जेल आनंद कुमार और एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार को पूरे प्रकरण से अवगत कराया। मामला प्रमुख सचिव गृह तक पहुंचा। मुनीर को चौबीस घंटे के लिए जिला कारागार बिजनौर में रखने का फरमान डीआइजी जेल और डीएम के पास लखनऊ से पहुंचा। इसके बाद मुनीर को शनिवार तक जिला कारागार, बिजनौर में दाखिल किया गया। शनिवार को सजा के बाद मुनीर को जजी परिसर से सीधा सोनभद्र भेज दिया गया।

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Edited By: Parveen Vashishta