मेरठ, जेएनएन। कोविड-19 वैश्विक महामारी ने मानवीय जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। हमारे जीवन में आज ऐसे अनेक बदलाव आए हैं, जिनकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। आनलाइन शिक्षा से लेकर सरकारी दफ्तरों व न्यायालयों के आनलाइन कार्यप्रणाली तक हर चीज को करने के तौर-तरीके पूरी तरह से बदल चुके हैं।

छात्रों के जीवन पर भी इस महामारी का बहुत गहरा असर पड़ा है। पूरी शिक्षा प्रणाली लैपटाप, मोबाइल आदि उपकरणों तक सिमट कर रह गई है। जहां एक ओर इन उपकरणों ने छात्रों को इन विकट परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त करने में सहायता की है, वहीं दूसरी ओर इनके कारण छात्रों के स्वास्थ्य पर भी काफी बुरा असर पड़ा है। लगातार मोबाइल फोन और लैपटाप के सामने बैठकर पढ़ने से छात्रों को नेत्र रोग, पीठ, गर्दन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जो आगे चलकर उनके स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हो सकता है।

ऐसे में छात्रों को अपने स्वास्थ्य पर निरंतर ध्यान देना चाहिए और नियमित रूप से व्यायाम व योग करना चाहिए। साथ ही अपने मस्तिष्क व शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी नींद लेना और पौष्टिक भोजन करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसके साथ-साथ मास्क लगाना, नियमित अंतराल पर हाथ धोना, अपने आस-पास स्वच्छता बनाए रखना और शारीरिक दूरी का पालन करना भी आवश्यक है।

निसंकोच यह महामारी संपूर्ण मानवता के लिए एक बहुत बड़ी आपदा साबित हुई है, लेकिन हम इस आपदा को एक अवसर में भी बदल सकते हैं। इसी उद्देश्य के साथ हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की है। भारत सबसे अधिक युवाओं वाला देश है और यदि युवा दृढ़ संकल्प के साथ विभिन्न क्षेत्रों में शोध और नवाचार करें तो भारत को विश्वगुरु बना सकते हैं। लाकडाउन काल में देखा भी गया है की अनेकों युवाओं ने विभिन्न तरह की विपत्तियों का सामना करने के लिए नए और रचनात्मक सुझाव दिए हैं और इस दौरान कई युवाओं ने सेल्फ एम्प्लायमेंट और स्टार्टअप्स की ओर कदम बढ़ाया है। सरकार भी इस तरह के स्टार्टअप्स को पूरी तरह का सहयोग प्रदान कर रही है। देश के युवा को इस आपदा को एक अवसर के रूप में लेना चाहिए और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास करना चाहिए।

आपका स्पर्श रस्तोगी, केएल इंटरनेशनल स्कूल

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