मेरठ,जेएनएन। विश्व प्रकृति निधि, वन्य जीव संस्थान एवं वन विभाग द्वारा प्रदेश में डाल्फिन की गणना एवं जागरूकता अभियान के लिए सर्वेक्षण टीम बिजनौर बैराज से रवाना हुई। इस मौके पर 433 कछुए भी गंगा नदी में छोड़े गए तथा गंगा किनारे बसे गांवो के लोगो को एकत्र कर डाल्फिन समेत जलीय जीवों का गंगा मे महत्व भी बताया।

डाल्फिनों की संख्या, उसके प्राकृतिक वास स्थलों पर मंडरा रहे खतरों की पहचान करने के लिए व लोगों को जागरूक करने के लिए बिजनौर बैराज से सर्वेक्षण टीम रवाना हुई। टीम को वन्य जीव संस्थान वैज्ञानिक प्रो कमर कुरैशी, डा. विष्णु प्रिया व विश्व प्रकृतिनिधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी शाहनवाज खान ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। टीम ने पहले दिन लगभग 30 किमी की दूरी तय कर सिरजेपुर गंगा घाट पर पहुंच गए है। जहां अन्य टीम ने ग्रामीणों को डाल्फिन संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए जानकारी दी।

शाहनवाज खान ने बताया कि सर्वे में डाल्फिन के अधिक संख्या पाए जाने से गंगा नदी के स्वस्थ होने का सुखद संकेत मिले है। बिजनौर बैराज पर सीसीएम एनके जानू व डीएफओ बिजनौर कन्हैया पटेल की मौजूदगी में 433 कछुए भी छोड़े गए।

नदी की लाइफ लाइन है डाल्फिन

सीनियर कोíडनेटर संजीव यादव ने बताया कि जिस नदी मे डाल्फिन पायी जाती है, वह उस नदी के स्वस्थ रहने का सूचक है।

ईवीएम व वीवीपैट को लेकर मतदाताओं को किया जागरूक: हस्तिनापुर में कई स्थानों पर शनिवार को ईवीएम व वीवीपैट के प्रयोग को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान राजस्वकर्मियों व ट्रेनरों ने इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के माध्यम से पड़ने वाले वोटों के तौर तरीकों को सीखा। लेखपाल किशनचंद के नेतृत्व वोट डालने की जानकारी लोगों को दी। ट्रेनर विपिन कुमार ने भी जानकारी दी।

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