मेरठ: अवैध कालोनियों की जांच को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित न्यायिक आयोग उल्देपुर पहुंचा
Meerut News: सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग मेरठ के उल्देपुर क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों की जांच के लिए गुरुवार ...और पढ़ें

मेरठ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग के अध्यक्ष जस्टिस सुधांशु धूलिया के साथ अधिकारी।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित किया है न्यायिक आयोग।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की जांच को पांच बिंदु निर्धारित किए, इससे इतर भी जांच में शामिल करने की छूट।
जागरण संवाददाता, मेरठ। मेरठ-रूड़की हाईवे के समीप स्थित उल्देपुर क्षेत्र में विकसित हुई अवैध और कच्ची काॅलोनियों की विस्तृत जांच तथा इनके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित किया है। गुरुवार को यह आयोग सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद उल्देपुर पहुंंचा।

मौेका मुआयना करने के बाद आयोग के अध्यक्ष ने वहां बने प्रोपटी डीलर के आफिस व उनके बाहर खड़ी गाड़ियों को लेकर भी अफसरोंं से सवाल किए। पूछा कि इस क्षेत्र में बिना तलपट मानचित्र स्वीकृति के कितनी काॅलोनियां विकसित हुईं? कितनी अवैध कालोनियों पर कार्रवाई हुई ? जिन पर कार्रवाई नहीं, उसके पीछे कारण क्या रहा?
सुप्रीम कोर्ट मे न्यायिक आयोग की जांच के लिए पांच बिंदु निर्धारित किए हैं और आयोग के इससे इतर बिंदुओं को भी जांच में शामिल करने की छूट दी है। 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह आयोग गठित हुआ था। जिसके बाद से अधिकारी, उल्देपुर क्षेत्र में काॅलोनियां विकसित करने वाले लोगों की नींद उड़ी हुई है।
इन अवैध निर्माण के संबंध में तथा अन्य अवैध निर्माण की शिकायतें करने वाले लोग भी आयोग के मेरठ आगमन का इंतजार कर रहे हैं। बुधवार को ही संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने भी केंद्रीय कानून मंत्री से मुलाकात की है।
गुरुवार को आयोग अध्यक्ष दिल्ली से मेरठ एक्सप्रेसवे होते हुए सर्किट हाउस पहुंचे। यहां अधिकारियों के साथ बैठक करके उन्होंने तहसील सदर व मेडा द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट को देखा। बाद में वह उल्लेदपुर मौका मुआयना के लिए रवाना हुए।
ये हैं न्यायिक आयोग की जांच के बिंदु
- जिन भूमि पर अवैध काॅलोनियां बसाई गईं वह सरकारी है अथवा निजी।
- भूमि निजी है तो इसके वास्तविक मालिक कौन हैं?
- भूमि मालिकों और उसके खरीदारों के बीच लेनदेन का माध्यम क्या रहा?
- मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रहे, उन्होंने इन अवैध कालोनियों के निर्माण की अनुमति क्यों दी?
- अवैध कलोनियां प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत एवं साठगांठ से विकसित हुई हैं तो इसके लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं?
