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त्योहारों से पहले चीनी ने दिया झटका! UP के जिलों में ₹62-70 प्रति किलो तक पहुंचे दाम; रिकवरी कम आने से पेराई सत्र भी टला

By Sushil MishraEdited By: Praveen Vashishtha
Published: Wed, 14 Oct 2026 04:00 PM (IST)

त्योहारी सीजन में चीनी की आपूर्ति में कमी और पेराई सत्र में देरी के कारण मेरठ सहित यूपी के कई ...और पढ़ें

AI जेनरेटिड फोटो

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HighLights

  1. पिछले चार-पांच दिनों में 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए मिलों से बिकने वाली चीनी के दाम।

  2. वेस्ट यूपी में बरसात से गन्ने की फसल को नुकसान, रिकवरी कम होने से इस माह पेराई शुरू नहीं करेंगी मिलें।

सुशील कुमार मिश्र, मेरठ। आपूर्ति की कमी, पेराई सत्र का आगे खिसकना और त्योहारों में बढ़ती खपत के बीच बाजार में चीनी की किल्लत गहराती जा रही है। त्योहारी सीजन के बीच मिलों से बिकने वाली थोक चीनी के भाव बीते चार-पांच दिनों में 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं।

फुटकर के दाम भी एक हफ्ते में 10 से लेकर 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़कर 62 से 70 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गए हैं। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि मांग और आपूर्ति में भारी अंतर होने की वजह से दाम बढ़ रहे हैं।

बिजनौर की द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कारपोरेट) सलिल आर्य का कहना है कि आम घरों में चीनी की खपत अधिक नहीं होती, इसलिए थोड़ी वृद्धि से उपभोक्ताओं पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा।

अगस्त की शुरुआत में मिलों से बिकने वाली चीनी के दाम करीब 4,400 रुपये प्रति क्विंटल थे। त्योहारी मांग बढ़ने और आपूर्ति की कमी के बीच भाव 31 अगस्त को 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। इसके बाद सरकार की तरफ से चीनी की खरीद और स्टाक से जुड़े नियमों को सख्त किया गया।

जिसका असर बाजार भाव में भी दिखा था, सितंबर में एक्स फैक्ट्री प्राइस 4,350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। अब एक बार फिर तेजी आई है। मिलों से उठने वाली चीनी का भाव 4,650 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। बाजार में अनुमान है कि आपूर्ति सुधरने से पहले थोक भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर सकते हैं। लगातार बारिश से गन्ने की मिठास यानी रिकवरी प्रभावित हुई है।

इस कारण 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला पेराई सत्र नवंबर तक खिसक गया है। पुराना स्टाक तेजी से खत्म हो रहा है। बिजनौर की बरकातपुर और बिजनौर मिलों के गोदाम चीनी से पूरी तरह खाली हो चुके हैं। ऐसी ही स्थिति पश्चिमी उप्र की अन्य मिलों की है, जहां स्टाक या तो खत्म हो गया या खत्म होने की कगार पर है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक दाम बढ़ने की अपेक्षा में कुछ कारोबारियों ने भी बिक्री रोक ली है। इससे बाजार में उपलब्ध चीनी और सीमित हो गई।

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उत्पादन में कमी की है आशंका

महाराष्ट्र में गन्ने की पैदावार 20 प्रतिशत और कर्नाटक में 30 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है। इन दोनों राज्यों में चीनी उत्पादन भी इसी अनुपात में घट सकता है। उत्तर प्रदेश में बारिश से गन्ने की रिकवरी प्रभावित होने की चिंता है।

शुरुआती गन्ने में अपेक्षित मिठास नहीं आ पाने से मिलें पेराई शुरू करने में संकोच कर रही हैं। इससे नई चीनी के बाजार में आने में देरी होगी और पुराने स्टाक पर दबाव बढ़ेगा।

बरकातपुर चीनी मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह का कहना है कि बरसात से गन्ने की फसल को बहुत नुकसान पहुंचा है। रिकवरी भी कम आ रही है। अभी पेराई संभव नहीं है।