मेरठ, जेएनएन। लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की विभागाध्यक्ष एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यासमीन उसमानी ने कोरोना के मरीजों पर अध्ययन करके यह दावा किया है कि कोरोना की अधिकृत जांच आरटी पीसीआर के मुकाबले एचआर सीटी चेस्ट स्कैन नितांत आवश्यक है। एचआर सीटी से मरीज में होने वाली जटिलताओं का शुरू में ही पता लगाया जा सकता है।

बीमारी के लक्षण पाए गए

शोधकर्ता डॉ. यासमीन ने भर्ती हुए 1680 कोरोना मरीजों में से 1353 की छाती का एक्स-रे और 47 मरीजों का एचआर सीटी (हाई रेजल्यूशन कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी) किया। पाया गया कि छाती के एक्स-रे में लक्षण न होने पर भी एचआर सीटी में बीमारी के लक्षण पाए गए। शोधकर्ता का यह भी दावा है कि एचआर सीटी से मरीज की बीमारी की वृद्धि का पता भी बहुत जल्दी चल जाता है।

जांच अधिक सहायक

इससे मरीज का जल्द इलाज व मरीज में होने वाली जटिलताओं को भी रोका जा सकता है। मरीज को वक्त रहते जरूरी दवाएं शुरू की जा सकती हैं। शोधकर्ता के अनुसार इस जांच के फालोअप में भी मरीज की गंभीरता का पता चलता है। आरटी पीसीआर नकारात्मक होने के बाद भी मरीजों की एचआर सीटी स्कोरिंग की गई। इसमें एचआर सीटी की संवेदनशीलता 98 फीसद व आरटी पीसीआर की 70 फीसद पाई गई है। शोधकर्ता ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में एचआर सीटी जांच उपलब्ध है। मरीजों के उपचार में यह जांच अधिक सहायक है।

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