मेरठ, [विवेक राव]। Special Column इस समय सभी तरह के शिक्षण संस्थान, कोचिंग बंद हैं। लोग अपने घरों में सुरक्षित बैठे हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती प्रतियोगी छात्रों के सामने आने लगी है। उनके मन में एक तरफ जीवन की परीक्षा चल रही है, तो दूसरी ओर उनके भविष्य की। प्रतियोगी छात्रों को इन दोनों ही परीक्षाओं में सफल होना है। वे इसके लिए तैयारी भी कर रहे हैं। कोरोना वायरस के चलते आज पढ़ने, पढ़ाने का तरीका बदल गया है। अब इसमें मेरठ में चार्टर्ड एकाउंट की पढ़ाई ही देखिए। पहले सीए पढ़ने वाले छात्र- छात्रएं शहर में स्थित सेटेलाइट क्लास में आनलाइन पढ़ते थे। जब से लॉकडाउन हुआ, सेटेलाइट क्लास चलाने वाले विशेषज्ञों ने छात्रों को मोबाइल पर लिंक दे दिया। अब घर बैठे सीए की पढ़ाई हो रही है। इसमें फ्रेंचाइजी लेने वालों को अपने सेटअप की चिंता सताने लगी है। इस समय चिंता ठीक नहीं है।

ज्ञान को विज्ञान से जोड़िए

एक हजार से अधिक कॉलेजों को संबद्धता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से है। मेरठ और सहारनपुर मंडल में करीब छह लाख विद्यार्थी इन कॉलेजों में पढ़ते हैं। हजारों की संख्या में शिक्षक हैं। कोरोना की वजह से शिक्षण कार्य से लेकर पढ़ाई सब कुछ बंद है। ऐसी विषम परिस्थितियों में घर पर रहते हुए शिक्षकों की जिम्मेदारी कम नहीं है। विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से एक कोशिश और अपील की गई कि शिक्षक घर पर रहते हुए छात्रों का मार्गदर्शन करें। उनके लिए ई कंटेंट उपलब्ध कराएं, आनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करें। कुछ कॉलेजों के शिक्षक छात्रों को आनलाइन पढ़ाने से लेकर फोन पर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, तो कुछ शिक्षक तकनीक में तंग होने का बहाना बना रहे है। ऐसे में शिक्षकों को भी सोचने की जरूरत है कि वह अपने ज्ञान को विज्ञान से जोड़कर कैसे छात्रों तक पहुचाएं।

कोरोना पढ़ाने का विचार अच्‍छा

कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलाने की अपील चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय भी कर रहा है। इस अपील को कुछ कॉलेज भी आगे बढ़ा रहे हैं। विश्वविद्यालय के विज्ञान के पाठ्यक्रम में अभी तक किसी भी वायरस की पढ़ाई नहीं होती है जबकि विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान, विष विज्ञान से लेकर जंतु विज्ञान के अलग-अलग विभाग और फैकल्टी हैं। अब विश्वविद्यालय की ओर से वायरस को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के लिए विभागाध्यक्षों से कहा गया है। जंतु विज्ञान विभाग ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। कोविड-19 वैश्विक महामारी को विश्वविद्यालय अपने आपदा प्रबंधन कोर्स का भी हिस्सा बनाने जा रहा है। इसमें वैश्विक महामारी से निपटने के तरीके बताए जाएंगे। वायरस को अध्ययन से जोड़ने के साथ शोध में भी इस विषय को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं कुलपति। अगर यह धरातल पर आता है तो सभी के लिए अच्छा है।

यह वक्त का इम्तिहान है

कोरोना वायरस की वजह से चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय की परीक्षा बीच में रोकनी पड़ी। वायरस का संकट टला नहीं, उसके बीच में फिर से शेड्यूल जारी कर दिया। लॉकडाउन की वजह से इसे फिर स्थगित करना पड़ा। ऐसे में लाखों छात्र- छात्रओं के सामने चुनौती बढ़ गई है। इस घड़ी में वह एक तरफ कोरोना के संकट को देखकर चिंतित हैं, तो दूसरी ओर परीक्षा की भी चिंता सता रही है। माहौल ऐसा है कि वह घर पर रहकर भी पढ़ नहीं पा रहे हैं। इसमें कुछ ऐसे छात्र भी हैं जो हर परीक्षा की चिंता छोड़ सोशल मीडिया पर अफवाहों को हवा देने में जुटे हैं। एक ऐसे वक्त में जब हर कोई एक अदृश्य दुश्मन के खिलाफ एकजुट हैं, वहां किसी भी शरारत की जगह नहीं। विश्वविद्यालय का इम्तिहान तो दे देंगे, उससे पहले इस वक्त के इम्तिहान को पास करना है।