मेरठ (जेएनएन)। वातावरण में गुलाबी ठंड के घुलने के साथ ही दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण का खतरा मंडराने लगा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने पिछले 25 दिनों में वायु प्रदूषण फैलाने के जिम्मेदार 545 मामले दर्ज किए हैं। वहीं शहर को प्रदूषण मुक्त करने का जिम्मा निभाने वाली सरकारी एजेंसियां मानो बेपरवाह नजर आ रही हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अभी तक मानव स्वास्थ्य के लिए घातक स्माग की रोकथाम की कार्य योजना ही नहीं बनाई है।

कूड़े से उठ रहा जहरीला धुआं
मेरठ में कूड़ा निस्तारण समस्या बना हुआ है जगह-जगह कूड़े ढेर खुले में लगे हैं। कई स्थानों पर सड़कों के किनारे तो कहीं सरकारी कार्यालयों के परिसर में ही कूड़ा जलाया जा रहा है। जहरीला धुआं उगलते खटारा वाहनों की संख्या सत्तर हजार का आंकड़ा पार कर गई है जिनको शहर से बाहर करने की कोई ठोस योजना नहीं है। समस्या से निपटने के लिए सीपीसीबी ने दिल्ली में तो एहतियाती उपाय आरंभ कर दिए हैं वहीं स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
41 टीमें रख रहीं नजर
रिसर्च एंड रिलीफ संस्था के नवीन प्रधान ने बताया कि सीपीसीबी ने 41 टीमें प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की रोकथाम के लिए तैनात की हैं। इन टीमों ने 15 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच दिल्ली में 277, फरीदाबाद में 168, नोएड़ा में 61 और गाजियाबाद में 39 मामले पकड़े हैं जो प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं।
ऐसे ही मौसम में पनपता है स्माग
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं। 15 अक्टूबर के बाद इसमें और तेजी आएगी जब फसल की कटाई हो चुकी होगी और किसान पराली को जलाएंगे। इस समय हवा का दिशा भी ऐसी है जो उठने वाले धुएं को दिल्ली और एनसीआर के वायुमंडल पर केंद्रित करती है। शहर के तापमान में विशेष रूप से रात के तापमान में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। शनिवार को भी न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री कमतर आंका गया। रात में ठंड बढ़ने से और दिन में चटक धूप होने से वायुमंडल की नमी का वाष्पीकरण होता है और रात में तापमान गिरने से यह वाष्प ही ओस का रूप ले लेती है। ओस की बूंदों में वाहनों और फैक्टियों से निकलने वाले जहरीले धुएं के कण चिपक जाते हैं सुबह के समय स्माग का रूप ले लेते हैं।
प्रदूषण से संबंधित कारक
-खुले में हो रही कंस्ट्रक्शन संबंधी गतिविधियां
-खुले में भवन निर्माण सामग्री का भंडारण
-जगह जगह लगे कूड़े के ढ़ेर, और उन्हें जलाना
-10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का संचालन
-प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियां
-बिना जिग-जैग चिमनी के चल रहे ईंट भट्ठे।

Posted By: Ashu Singh