मेरठ। सुरों की साधिका को संगीत के मंदिर में स्वरांजलि देने की अनुपम बेला। संगीत के सरोवर में हुनर के हजारों दीप जल पड़े। सर्द शाम नृत्य, गायन एवं वादन की नक्षत्रशाला से जगमग हो गई। गुरुजनों के सटीक मार्गदर्शन में निखरे कलाकारों ने संगीत की अध्यात्मिक असर का भी एहसास कराया। शिवांगी संगीत महोत्सव में कलाकारों ने रविवार को एक कार्यक्रम में स्वरों की महादेवी प्रेम शर्मा को अपनी प्रस्तुति से प्रणाम किया।

संगीत विभूति प्रेम शर्मा की स्मृति में चौ. चरण सिंह विवि स्थित प्रेक्षागृह में संगीत महोत्सव का आयोजन किया गया। मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ संगीतमय प्रस्तुति का दौर चला। शिवांगी संगीत महाविद्यालय के कलाकारों ने सबसे पहले राग देशकार और राग भटियार में निबद्ध वेदमंत्र और राग पूरिया धनाश्री में सरस्वती वंदना पेश किया। इसके बाद कलाकारों ने मंगलाचरण के जरिए भगवान गणेश को प्रणाम किया। राग यमन में पेश.. हे गणराज महराज की भावपूर्ण प्रस्तुति दर्शकों को बेहद रास आई। इसके बाद कलाकारों ने राधा और कृष्ण के सुंदर रूपों का वर्णन करते हुए तीन ताल में निबद्ध रचना 'मुकुट पर वारी जाऊं नंदा' पेश की। नृत्य व गायन की जुगलबंदी का भरपूर असर नजर आया। शास्त्रीय गायन में कलाकारों की तैयारी साफ नजर आई। बाल वर्ग के छात्रों ने मां दुर्गा के रूपों को याद करते हुए राग दुर्गा में एक द्रुत खयान गायन पेश किया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की ़गड़गड़ाहट के साथ संगीत साधकों को प्रोत्साहित किया। कथक अंग में तराना की प्रस्तुति की गई। अगली प्रस्तुति में मंच पर होली का रंग बहने लगा। 'होरी खेले नंदनलाल ग्वाल संग आज ब्रिज होरी मची' की बोलों पर लड़कियों ने आकर्षक नृत्य के जरिए कला का इंद्रधनुष खंीच दिया। छात्रों ने राग भीमपलासी पार आधारित एकताल में निबद्ध तराना पेश किया। कलाकारों ने बहलावे, आलाप, तान की मनमोहक प्रस्तृति की। संगीत की दुनिया में रास और रंग से ओतप्रोत ठुमरी भी मंच पर खूब सजी। छात्राओं ने..ऐ री सखी मोरे पिया घर आए के गायन से अपनी तैयारियों का एहसास कराया। अंत में रुचि बालूनी के निर्देशन में राग जोग पर आधारित निकास पेश किया गया। इसे कत्थक नृत्य के नए प्रयोग के रूप में जाना जाता है, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। शिवांगी की निदेशिका ऋचा शर्मा ने अपनी मां प्रेम शर्मा को याद करते हुए भावुकता भरा संबोधन दिया। संगीत संयोजन राजा बालूनी ने किया। तबले पर सप्तक शर्मा, मोहम्मद फारुख और उत्तम गोस्वामी ने संगत की। सितार पर सोमेंद्र, बांसुरी पर रवींद्र, गायन में ऐश्वर्या, अमन व पुष्कर ने संगत दी। पढ़ंत अदिति और मंच संचालन डा. मीनाक्षी शास्त्री का रहा। भातखंडे संगीत विद्यापीठ की रजिस्टार मीरा माथुर समेत कई अन्य विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे।

Posted By: Jagran

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