मेरठ,जेएनएन। गगोल सहकारी दुग्ध संघ (पराग) के लिए दूध ठंडा करने वाली समितियों में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच 15 महीने में भी पूरी नहीं की जा सकी है। दुग्ध आयुक्त ने जांच रिपोर्ट प्राप्त न होने पर आपत्ति जताते हुए जिलाधिकारी से जल्द रिपोर्ट मांगी है। जिसके बाद हलचल मच गई है।

पराग दूध फैक्ट्री और इससे जुड़ी समितियों में भ्रष्टाचार और धाधली के आरोप लगते रहते हैं। जांच में धांधली साबित होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाती है। श्रद्धापुरी कंकरखेड़ा निवासी प्रदीप शर्मा ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर पराग दूध फैक्ट्री के बल्क मिल्क कूलर रामनगर और ललियाना में दूध ठंडा करने के नाम पर घोटाला, अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। दुग्ध संघ के अध्यक्ष और फैक्ट्री महाप्रबंधक पर भी आरोप लगाए थे। सीएम के निर्देश पर दुग्ध आयुक्त ने इन आरोपों की जांच का आदेश दिया था। लेकिन लगभग 15 महीने में भी न जांच पूरी हुई और न ही रिपोर्ट मिली। दुग्ध आयुक्त द्वारा इस संबंध में डीएम को पत्र भेजकर आपत्ति जताते हुए जांच को जल्द पूरी करने के लिए कहा गया है। डीएम के बालाजी ने इस संबंध में सीडीओ को निर्देश दिया है। जिसके बाद संबंधित समितियों में हड़कंप मचा है।

छह माह की बच्ची की रीढ़ का किया आपरेशन: मेडिकल कालेज का न्यूरोसर्जरी विभाग जटिल आपरेशन करने लगा है। तीन नए डाक्टरों की टीम ओपीडी भी कर रही है। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डा. संजय शर्मा ने बताया कि छह माह की एक बच्ची की रीढ़ में फोड़ा बन गया था। दिमाग में पानी भरा था, जिसके लिए टयूब डाली गई। बाद में रीढ़ में बने गुच्छों को हटाकर बच्ची को नई जिंदगी दी गई। उसकी तबीयत बेहतर है। डाक्टर ने बताया कि आपरेशन सफल रहा है। दिमाग से नसों का नियंत्रण होता है। ये बच्चों की जन्मजात बीमारी होती है, जब पैरों में जाने वाली नसें गुच्छा बनाकर रीढ़ में ही फोड़ा बना देती हैं।

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