मेरठ, [रवि प्रकाश तिवारी]। काली नदी को पुनर्जीवित करने में अब स्वयं जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहयोग का हाथ बढ़ाएंगे। संसद के शीतकालीन सत्र के बाद वे मेरठ पहुंचेंगे और काली नदी को पुनर्जीवित करने के मकसद से आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसकी जानकारी सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने दी है। उन्होंने कहा कि दैनिक जागरण के अभियान काली बुला रही है...से काली को पुन: उसके पुराने स्वरूप में पहुंचाने की कोशिश सबल हुई है और उसे सिरे तक जरूर पहुंचाया जाएगा।

नदी को नवजीवन मिले

सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि काली नदी के प्रदूषण और अतिक्रमण से जुड़ी दिक्कतों को लेकर उन्होंने जलशक्ति मंत्री से बात की थी और उन्होंने संसद सत्र के खत्म होते ही मेरठ आने की बात कही है। सांसद ने कहा कि काली नदी के आसपास ही एक बड़ा आयोजन कर नमामि गंगे योजना व जलशक्ति मंत्रलय के सहयोग से इस नदी को जिंदा करने में पूरी ताकत झोंकी जाएगी। काली को खोदाई में जुटे नीर फाउंडेशन के निदेशक और नदी पुत्र रमन त्यागी का कहना है कि नदी के किनारे पर सघन वृक्षारोपण हो जाए और सरकारी प्रयास से नदी के आसपास के तालाब रिचार्ज हो जाएं तो नदी को नवजीवन मिल जाएगा। जलशक्ति मंत्रलय इन कार्यो को सुनिश्चित कराकर गंगा की इस सहायक नदी को न सिर्फ प्रदूषण मुक्त करा देगा, इसके आसपास के लोगों को भी नवजीवन देगा।

जल में ऑक्सीजन का दम घोंट रहे रसायन

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट काली नदी में बीओडी (जैव घुलनशील रसायन) की मात्र 369 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पायी गई। मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर के गुलावठी और मेरठ के खरखौदा, परीक्षितगढ़ में काली नदी में कोलीफार्म का स्तर सर्वाधिक मिला। रिपोर्ट के मुताबिक देश की अन्य प्रदूषित नदियों की तुलना में यह मात्र कई गुना ज्यादा है। इसके साथ ही कार्बनिक एवं अकार्बनिक रसायन और उर्वरक मिलकर जल में ऑक्सीजन खत्म करने के साथ-साथ वैद्युत चालकता बढ़ा देते हैं। पेपर मिल, शुगर मिल, हिस्टलिरीज, चर्मशोधन इकाईयां एवं बैटरी कारोबार से नदी में भारी तत्वों की मात्र बढ़ी है।

नदी के पानी में भारी तत्व दे रहे हैं असाध्य रोग

केंद्रीय भूजल बोर्ड बोर्ड ने काली नदी व नालों के आसपास के पेयजल स्नोतों से 119 सैंपलों की जांच रिपोर्ट तैयार की। 44 में आयरन की मात्र काफी ज्यादा मिली। कुढ़ला गांव में आयरन 11.2 मिग्रा. प्रति ली. थी जो पाचन तंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है। मैंगनीज के 119 सैंपलरें में 89 में मात्र असंतुलित मिली, जो लकवा का कारण बन सकती है। इसी तरह इलेक्ट्रोप्लेटिंग एवं पेस्टीसाइड के इस्तेमाल से अजीतपुर में स्थिति बिगड़ी हुई थी। जामड़ और रसूलपुर में लेड की मात्र ज्यादा मिली।

सात दिन बाद फिर से शुरू हुई काली की खोदाई

काली नदी के पुनर्जीवित करने के लिए चलाई जा रही मुहिम में गुरुवार को नदी के उद्गमस्थल पर खोदाई का काम दोबारा शुरू कर दिया गया। उक्त कार्य सात दिन पहले हुई बारिश के चलते रोका गया था। दिनभर जेसीबी मशीन मिट्टी निकालने में जुटी रही। काली नदी को जिंदा करने को नीर फाउंडेशन द्वारा गांव अंतवाड़ा में नदी के उद्गमस्थल पर खोदाई का कार्य शुरू किया गया था। यहां जेसीबी से खोदाई कराकर मिट्टी निकाली जा रही है। गत 28 नवंबर को बारिश से काली नदी की खोदाई का कार्य रोक दिया गया था। एक सप्ताह बाद दोबारा मिट्टी निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। दिनभर जेसीबी मशीन नदी से मिट्टी निकालने में जुटी रही। उधर, नदी के उद्गमस्थल पर पूरे दिन नदी के दर्शन के लिए लोगों को तांता लगा रहा। नदी के उद्गम पर पानी देखकर लोग खुश नजर आए। लोगों ने नदी की पूजा भी की। नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन त्यागी का कहना है कि बारिश से नदी के उद्गमस्थल पर मिट्टी पर वाहन फिसलने का खतरा बना था। अब मिट्टी सूख गई है। नदी में खोदाई का कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। खोदाई के काम में जेसीबी व मिट्टी ले जाने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली को लगाया गया है। 

Posted By: Taruna Tayal

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