मेरठ, जेएनएन। मेरठ बार एसोसिएशन ने वर्तमान अध्यक्ष पर कथित टिप्पणी से नाराज होकर वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्रपाल सिंह की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। यह निर्णय कार्यकारिणी की आपात बैठक करके लिया गया। इस निष्कासन के विरोध में तमाम अधिवक्ता भी उतर आए हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को बार के नियमविरुद्ध बताया है। साथ ही पदाधिकारियों की शिकायत उ.प्र. बार काउंसिल से करने की घोषणा की है।

एक मत से निष्‍कासन का लिया फैसला

एसोसिएशन के अध्यक्ष मांगेराम व महामंत्री नरेश दत्त शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस संबंध में शुक्रवार को एसोसिएशन की आपातकालीन बैठक हुई। आरोप है कि मेरठ बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेन्द्रपाल सिंह द्वारा 17 अक्टूबर गुरुवार को जिला न्यायाधीश मेरठ के न्यायालय में मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व बार एसोसिएशन को अपमानित करते हुए कथित टिप्पणी की गई। इस विषय में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार सिंह, सुधांशु सरोहा, मृगेंद्र सिंह, अब्दुल जब्बार खान, सुमित चौधरी द्वारा बताए गए घटनाक्रम पर चर्चा की गई। सुमित चौधरी ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। जिस पर प्रबंध समिति के सभी सदस्यों ने एक मत से सदस्यता निष्कासित करने का प्रस्ताव पारित किया। दो सदस्यों में मयंक गुप्ता व अभिषेक यादव ने निष्कासन से पूर्व नोटिस दिए जाने की मांग रखी थी, लेकिन अन्य सभी सदस्यों ने एक मत से नरेंद्रपाल सिंह को निष्कासन का प्रस्ताव पारित किया है।

मेरठ बार एसोसिएशन को नोटिस देंगे अधिवक्ता

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता रोहताश कुमार अग्रवाल ने लिखित बयान जारी करके बताया कि एसोसिएशन की नियमावली के नियम 51 में 14 दिन का नोटिस देने व सदस्यों की सहमति पर ही ऐसा निर्णय लेने की प्रक्रिया निर्धारित है। यह दुर्भावनापूर्ण कार्य है जो कि प्रोफेशनल मिसकंडक्ट की श्रेणी में आता है। अध्यक्ष ने मेरठ बार को कमजोर करने की कोशिश की है। इससे एसोसिएशन कई हिस्सों में बंट जाएगी। इस घटनाक्रम के संबंध में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चेयरमैन और सदस्यों को पत्र भेजकर मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता राजपाल सिंह ने कहा कि इस कार्रवाई से एसोसिएशन दो फाड़ हो जाएगी। निष्कासन पत्र में यह भी उल्लेख नहीं किया गया कि एसोसिएशन के विरुद्ध क्या टिप्पणी की गई है। मेरठ बार के पूर्व अध्यक्ष सतीशचंद गुप्ता ने भी कहा कि यह कार्रवाई नियमानुसार नहीं है।

निष्कासन पर यह बोले नरेंद्र पाल

यदि सही व सत्य बात कहना अपराध है तो मैंने अपराध किया है। मैंने हमेशा बार और बार के सदस्यों के हित में कार्य किया है। जो चीज मुझे उचित नहीं लगती, उसका हमेशा विरोध किया है। मुझे पूर्व में कभी बार से निकाला नहीं गया। जब भी मुझे कोई बात सही नहीं लगी तो मैंने स्वयं बार से इस्तीफा दिया है। मैंने जिला जज के समक्ष यह तथ्य बताया था कि बार में पिछले दो वर्ष से चुनाव में जो भी अधिकारी उच्च पद पर चुने गए हैं, उन्होंने बार के सदस्यों को शराब पिलाई है, इसलिए दो वर्षों से मैं बार की बैठकों में नहीं जा रहा हूं। 2016 व 2017 के चुनावों में बतौर चुनाव अधिकारी शराब के दावों पर पूर्ण पाबंदी लगाते हुए मैंने चुनाव संपन्न कराए हैं इसलिए मैं शराब का हमेशा ही विरोध करता रहा हूं।

Posted By: Prem Bhatt

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