मेरठ, जेएनएन। वर्ष 1988 सियोल ओलंपिक्स में भारतीय हाकी टीम के सदस्य मोहिंदर पाल सिंह गुर्दे खराब होने के कारण दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। इनके दोनों गुर्दे खराब हो गए हैं। डाक्‍टरों ने कहा है कि इन्‍हें जल्‍द ही गुर्दें की जरूरत है। लंबी प्रतीक्षा सूची होने के कारण उनके स्वजन दानदाता को तलाश रहे हैं, जो एक गुर्दा उन्हें दान कर सके। उन्हें एबी पाजिटिव ब्लड ग्रुप वाले दानदाता की तलाश है। छावनी निवासी 58 वर्षीय ओलंपियन पिछले पांच सालों से गुर्दे की गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। साल 2017 में उनका उपचार शुरू हुआ था। पूर्व डिफेंडर मोहिंदर पाल सिंह ने वर्ष 1986 विश्व कप भी खेला था। वे अर्जुन अवार्डी हैं।

58 साल के एमपी सिंह के बेटे हरिमोहन सिंह ने बताया कि पिता किडनी की समस्‍या से जूझ रहे हैं। इनकी दोनों किडनी डैमेज हो चुकी है। डॉक्‍टरों ने कहा है कि तुरंत डोनर की जरूरत है। ऐसे में परिवार को डोनर की तलाश है। वहीं खेल मंत्रालय ने भी उन्हें हर तरह की आर्थिक मदद का भरोसा दिया है, लेकिन किडनी डोनर जितनी जल्दी मिलेगा, उतनी जल्दी उन्हें राहत मिल सकेगी।  

16 अक्‍टूबर 1962 को मोहिंदर पाल सिंह का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था। पहला इंटरनेशनल हॉकी मैच इन्‍होंने 1982 में खेला था। ये एक डिफेंडर के रूप में खेलते थे। सीयोल 1988 की ओलंपिक्‍स में इन्‍होंने चार गोल दागे थे। कनाडा के खिलाफ मैच में दो गोल दागे थे, जिसमें भारत ने कनाडा को पांच-एक से हराया था। वहीं भारत और अर्जेंटाइना के बीच रोमांचक मैच में एक गोल दागा था, यह मैच छह-छह अंकों से बराबरी पर रहा। इसके बाद इन्‍होंने पाकिस्‍तान के खिलाफ एक गोल दागा था, जो भारत का कूल गोल का स्‍कोर था। 

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