मेरठ, जेएनएन। सड़क दुर्घटना में दो दिन पूर्व दो बहनों की मृत्यु होने की घटना से स्कूल सहम गए हैं। अधिकतर स्कूलों में सीनियर वर्ग के बच्चे मोटर साइकिल व स्कूटी से ही स्कूल आते-जाते हैं। ऐसे में बार-बार सख्ती के बावजूद बिना सही उम्र के बच्चों को दुपहिया वाहन चलाने से बच्चों को रोका नहीं जा सका है। घटना को देखते हुए मंगलवार से स्कूलों ने एक बार फिर बच्चों पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। स्कूलों में दुपहिया वाहनों से आने वाले बच्चों को बिना हेलमेट स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

परिजनों को भी कर रहे जागरूक

स्कूलों ने परिजनों को भी जागरूक करना शुरू किया है। परिजनों को 16 साल की उम्र होने पर ही बच्चों को बिना गियर वाली स्कूटी लाइसेंस व हेलमेट के साथ देने को कहा जा रहा है। इसी तरह 18 साल की उम्र होने पर ही गियर वाले मोटर साइकिल बच्चों को दें। वह भी लाइसेंस बनवाने व हेलमेट के साथ जिससे बच्चों में ट्रैफिक नियमों को लेकर अनुशासन आ सके।

नहीं बने बच्चों के लाइसेंस

नियमों को सख्त करने के बाद एक बार आरटीओ में भीड़ लगी, लेकिन स्कूली बच्चों के लाइसेंस अब भी नहीं बन सके हैं। स्कूलों में कैंप लगाकर बच्चों का लाइसेंस बनवाने में मदद का आश्वासन आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस से कई बार मिला, लेकिन अब तक किसी भी स्कूल में ऐसा कोई कैंप नहीं लगाया जा सका।

बाहर करते हैं पार्किंग

स्कूलों द्वारा हर बार बिना हेलमेट के आने वाले बच्चों पर सख्ती करने से स्कूलों के आस-पास की पार्किंग अधिक मुनाफे में चलती है। बच्चे अपनी मोटर साइकिल स्कूल के निकटवर्ती पार्किंग में खड़ा कर स्कूल पहुंचते हैं। वहां तक न ही स्कूल देखता है और न ही बच्चों के परिजन ही पहुंचते हैं। इन्होंने कहा..

परिजनों को इस तरह के मामले में अधिक जिम्मेदार बनने की जरूरत है। हम बच्चों को बिना हेलमेट स्कूल में आने से रोक रहे हैं, लेकिन स्कूल के बाहर वह जिम्मेदारी से वाहन नहीं चलाते हैं।

-मधु सिरोही, प्रिंसिपल, एमपीजीएस कैंट हम बच्चों को रोड सेफ्टी क्लब के जरिये ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इस कोशिश में और तेजी लाने की जरूरत है ताकि बच्चों के साथ परिजन भी जागरूक व जिम्मेदार बन सकें।

-संजीव अग्रवाल, प्रिंसिपल, बीएनजी इंटरनेशनल स्कूल हम समय-समय पर बच्चों का मार्गदर्शन करने के साथ ही सख्ती भी बरतते हैं, लेकिन जरूरत है तो ट्रैफिक नियमों के अनुपालन में पुलिस के सख्ती बरतने और अधिक जुर्माना वसूलने की, जिसका असर दिखता है।

-चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल, सेंट जोंस सीनियर सेकेंड्री स्कूल

Posted By: Jagran

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