विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सरधना के ऐतिहासिक चर्च में कृपाओं की माता की तीर्थयात्रा का शुभारंभ आज, देशभर के श्रद्धालु होंगे शामिल, पूरा कार्यक्रम

By Shubham Gupta Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 29 Oct 2026 01:23 PM (IST)

सरधना के ऐतिहासिक चर्च को माइनर बसिलिका का दर्जा प्राप्त है। यहां कृपाओं की माता की वार्षिक तीर्थयात्रा ध्वजारोहण के साथ शुरू होगी। यह आयोजन 8 नवंबर तक होगा।

सरधना का ऐतिहासिक चर्च।

सरधना का ऐतिहासिक चर्च।  

HighLights

  1. बेगम समरू ने कराया था इसका निर्माण, चर्च को माइनर बसिलिका का दर्जा है प्राप्त।

  2. दीपावली और चर्च का मुख्य आयोजन एक दिन होने से पुलिस के लिए सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सरधना कस्बे के ऐतिहासिक चर्च में कृपाओं की माता की वार्षिक तीर्थयात्रा का शुभारंभ गुरुवार आज शाम चार से ध्वजारोहण के साथ होगा। इसके बाद पवित्र मिस्सा बलिदान होगा।

कृपाओं की माता की वार्षिक तीर्थयात्रा को लेकर चर्च में अधिकांश तैयारी पूरी हो चुकी है। चर्च के फादर मार्टिन रावत ने बताया कि आज शाम चार बजे ध्वजारोहण के साथ कृपाओं की माता वार्षिक तीर्थयात्रा का शुभारंभ होगा।

तत्पश्चात पांच बजे पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। इस दौरान मुख्य अनुष्ठाता मेरठ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष भास्कर जेसुराज रहेंगे। इसके बाद सात नवंबर तक प्रतिदिन शाम चार बजे माला विनती, नौरोजी प्रार्थना और पवित्र मिस्सा बलिदान किया जाएगा।

सात नवंबर को सुबह आठ और 10 बजे तथा शाम चार बजे हिंदी भाषा में पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। शाम छह बजे पंजाबी भाषा में मिस्सा बलिदान और रात आठ बजे प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।

आठ नवंबर को सुबह छह और आठ बजे पवित्र मिस्सा बलिदान होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे धर्माध्यक्षीय समारोही मिस्सा बलिदान का मुख्य आयोजन किया जाएगा। इसके मुख्य अनुष्ठाता प्रयागराज धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष लुईस मैस्करेन्हास रहेंगें।

देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचेंगे श्रद्धालु 

इस बार आठ नवंबर को ही दीपावली का पर्व भी है। ऐसे में कृपाओं की माता की वार्षिक तीर्थयात्रा और दीपावली को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। तीर्थयात्रा में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचेंगे। वहीं, दीपावली के चलते कस्बे के बाजारों में भी भीड़ रहेगी।

ऐसे में यातायात व्यवस्था सुचारु रखने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और भीड़ नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को विशेष इंतजाम करने होंगे।

बेगम समरू ने बनवाया था यह चर्च 

बेगम समरू ने इस ऐतिहासिक चर्च का निर्माण कराया था। चर्च की इमारत की वास्तुकला  बहुत आकर्षक है। बताया जाता है कि चर्च का निर्माण कार्य 1809 में शुरू हुआ था। गिरिजाघर के दरवाजे के पास स्थित इमारत का निर्माण काल 1822 दर्शाया गया है।  

इस चर्च को पोप जान (23वें) ने 1961 में माइनर बसिलिका का दर्जा प्रदान किया था। इसमें चर्च की भव्यता का काफी योगदान है। ऐतिहासिक और भव्य गिरिजाघरों को ही यह दर्जा मिलता है। यहां लगी कृपाओं की माता की चमत्कारी तस्वीर के कारण हर वर्ष इस चर्च में विशेष प्रार्थना और मेले की परंपरा शुरू हुई।