कौन हैं रूपल चौधरी, जो सेना में नायब सूबेदार बनने वाली UP की पहली महिला एथलीट बनीं; इस पद पर मिली है सीधी नियुक्ति
मेरठ की अंतरराष्ट्रीय धाविका रूपल चौधरी भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त होने वाली उत्तर प्रदेश की ...और पढ़ें

धाविका रूपल चौधरी
HighLights
जूनियर विश्व और एशियन चैंपियनशिप के पदकों के आधार पर मिली सीधी नियुक्ति।
कोर आफ मिलिट्री पुलिस में शामिल होकर भी जारी रखेंगी 400 मीटर की तैयारी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी मेरठ की धाविका रूपल चौधरी ने खेल के साथ भारतीय सेना में नई पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के आधार पर उन्हें भारतीय सेना में सीधे नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त किया गया है।
वह सेना में शामिल होने वाली प्रदेश की पहली महिला एथलीट हैं। रूपल को कार आफ मिलिट्री पुलिस (सीएमपी) में शामिल किया गया है। उनकी नियुक्ति पिछले वर्ष जून में हुई थी।
रूपल ने बताया कि आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पुणे के चीफ कोच यूनुस खान ने उनसे संपर्क कर सेना में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। यूनुस खान मूल रूप से मुरादाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने रूपल को बताया कि सेना अब महिला खिलाड़ियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर सहयोग कर रही है। इसके बाद तत्कालीन कमांडेंट देवराज गिल से उनकी बात कराई गई।
पिता पहले नहीं थे तैयार, रिश्तेदार ने किया मार्गदर्शन
रूपल के पिता ओमबीर सिंह शुरुआत में रूपल को सेना में भेजने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने रूपल से कहा कि पहले कबड्डी से जुड़े अपने रिश्तेदार और कोच जसवीर सिंह से बात करें। जसवीर सिंह मेरठ के रहने वाले हैं और यूपी योद्धा से जुड़े कोच भी रह चुके हैं।
उन्होंने रूपल को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और अधिकारियों से संपर्क में भी मदद की। पिता की सहमति के बाद रूपल ने सेना में जाने का फैसला किया।
रूपल के मुताबिक, सेना में खेल प्रतिभाओं के लिए पहले की तुलना में काफी बदलाव आया है। विशेष रूप से नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों की उपलब्धियों के बाद सेना में खेलों को लेकर समर्थन और सुविधाएं बढ़ी हैं।
अंतरराष्ट्रीय पदकों से मिला नायब सूबेदार का पद
रूपल की नियुक्ति का आधार उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां रहीं। उन्होंने जूनियर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एशियन चैंपियनशिप में पदक जीते हैं। इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर उन्हें सीधे नायब सूबेदार का पद दिया गया।
खेल कोटे में सेना की नियुक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि खिलाड़ी की उपलब्धियों के स्तर के आधार पर पद निर्धारित किया जा सकता है। रूपल ने बताया कि यदि उनके पास केवल राष्ट्रीय स्तर के पदक होते तो उनकी नियुक्ति हवलदार के पद पर होती। भविष्य में भी खेल उपलब्धियों के आधार पर पदोन्नति का रास्ता खुला रहेगा।
यह होते हैं सेना में नायब सूबेदार
नायब सूबेदार भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड आफिसर (जेसीओ) स्तर का पद है। यह सामान्य सैनिक पदों से ऊपर और कमीशंड आफिसर रैंक से नीचे की श्रेणी में आता है। जेसीओ सैनिकों और अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। उन्हें नेतृत्व, अनुशासन, प्रशिक्षण और यूनिट की जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।
हालांकि खेल कोटे से नियुक्त रूपल का प्राथमिक फोकस एथलेटिक्स है। सेना की खेल व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए आवश्यक अवसर दिए जाते हैं। रूपल ने बताया कि नियुक्ति के बाद उन्हें सामान्य सैनिकों की तरह नियमित बेसिक ट्रेनिंग नहीं करनी पड़ी और वह ज्वाइनिंग के बाद वापस अपने राष्ट्रीय कैंप में चली गईं।
चोट में भी सेना ने नहीं बनाया दबाव
रूपल ने बताया कि एशियन गेम्स में चोट के कारण वह हिस्सा नहीं ले पा रही हैं। इस दौरान सेना ने उन पर प्रदर्शन का कोई दबाव नहीं बनाया। अधिकारियों ने उन्हें कहा कि चोट के कारण हुई परेशानी को लेकर चिंता न करें और पहले पूरी तरह स्वस्थ हों।
उन्हें दोबारा अच्छी रेस के लिए तैयार होने का भरोसा भी दिया गया। सेना की ओर से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का सहयोग मिल रहा है। वेतन के अलावा जूते, स्पाइक्स, किट और सप्लीमेंट जैसी खेल संबंधी जरूरतों में भी सहायता मिलती है।
तिरुवनंतपुरम में जमैका के कोच से प्रशिक्षण
रूपल इस समय तिरुवनंतपुरम स्थित राष्ट्रीय कैंप में जमैका के कोच के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में वह सर्विसेज का प्रतिनिधित्व करेंगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए खेलेंगी।
400 मीटर की धाविका रूपल की नजर अब चोट से पूरी तरह उबरकर ट्रैक पर वापसी और बड़े अंतरराष्ट्रीय पदकों पर है। सेना के सहयोग से वह अपने खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
