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Asian Games : तकिये में कपड़ा भरकर शुरू की थी वुशू की प्रैक्टिस... और आज झोली में हैं ढेरों पदक व सम्मान

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sat, 26 Sep 2026 05:50 AM (IST)

नाओरेम रोशिबिना देवी ने एशियाई खेलों में लगातार तीसरी बार पदक जीतकर इतिहास रचा, चीन की खिलाड़ी से हारकर रजत ...और पढ़ें

मेरठ पहुंचने पर वुशू टीम का स्वागत व अभिनंदन करते भारतीय वुशू संघ के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह बाजवा व अन्य पदाधिकारी। जागरण

मेरठ पहुंचने पर वुशू टीम का स्वागत व अभिनंदन करते भारतीय वुशू संघ के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह बाजवा व अन्य पदाधिकारी। जागरण

HighLights

  1. रोशिबिना देवी ने एशियाई खेलों में लगातार तीसरा पदक जीता।

  2. किसान बेटी ने तकिये से अभ्यास कर रजत पदक हासिल किया।

  3. मणिपुर की सरकार ने उन्हें खेल कोटे से डीएसपी पद दिया।

जागरण संवाददाता, मेरठ। मणिपुर के बिष्णुपुर के किसान बेटी नाओरेम रोशिबिना देवी ने मुश्किल हालात से निकलकर एशियाई खेलों में लगातार तीसरी बार पदक जीतकर भारतीय वुशू में नया अध्याय जोड़ दिया। महिलाओं के 60 किग्रा वर्ग के फाइनल में चीन की शियाओयू झांग से 0-2 से हारकर उन्हें रजत पदक मिला। हालांकि स्वर्ण से चूकने का मलाल रोशिबिना को है, लेकिन लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय वुशु खिलाड़ियों में शामिल होकर बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।

जापान से पदक जीतकर शुक्रवार देर रात स्वदेश लौटने के बाद सबसे पहले रोशिबिना का आगमन वुशू संघ के पदाधिकारियों के साथ मेरठ आना हुआ। गाडविन होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रोशिबिना ने कहा कि लगातार तीसरे एशियाई खेलों में पदक जीतकर उन्हें बहुत खुशी है, लेकिन वह देश के लिए स्वर्ण नहीं ला सकीं, इसका अफसोस भी है। उन्होंने कहा कि आगे की प्रतियोगिताओं में अपनी गलतियों को सुधारने के लिए वह लगातार अभ्यास करेंगी।

मणिपुर से बीए की पढ़ाई पूरी करने वाली रोशिबिना का अंतरराष्ट्रीय पदक तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा। किसान पिता नाओरेम दामू सिंह शुरुआत में बेटी को वुशू खेलने देने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उसका जुनून देखकर उन्होंने पूरा साथ दिया। घर में संसाधन और आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। शुरुआती दिनों में पिता ने तकिए में कपड़ा भरकर उसे टांग दिया और उसी पर रोशिबिना को पंचिंग की प्रैक्टिस कराई। गांव में खेलती बेटी को देखकर पिता को समझ आया कि वह खेल को लेकर गंभीर है।

इसके बाद रोशिबिना ने गांव की एक वुशू खिलाड़ी को देखकर स्पोर्ट्स अथारिटी आफ इंडिया (साई) में जाने की इच्छा जताई। साई में प्रवेश मिलने के बाद उन्हें प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। प्रशिक्षण और यात्रा का खर्च उठाने के लिए पिता ने अपनी जमीन का एक हिस्सा तक बेच दिया। रोशिबिना कहती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति भले ही मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने उन्हें कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। इसी संघर्ष ने उन्हें कभी हार न मानने की सीख दी।

कोच अमित पाल बोले, तैयारी का समय बहुत कम था
पल्हेड़ा निवासी और भारतीय सेना में नायब सूबेदार अमित पाल इस एशियाई खेलों में भारतीय वुशू टीम के कोच रहे। वह 2022 से भारतीय टीम से जुड़े हैं और इससे पहले 2018 से 2022-23 तक भारतीय सेना की टीम को कोचिंग दे चुके हैं। अमित पाल ने बताया कि भारतीय टीम में सात खिलाड़ी थे, जिनमें चार सांडा और तीन ताऊलू वर्ग के खिलाड़ी शामिल थे। अन्य खिलाड़ियों को पदक नहीं मिल सका, जबकि रोशिबिना ने 60 किग्रा वर्ग में रजत पदक हासिल किया।

एक-दो खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल में मामूली अंतर से हारकर बाहर हुए। अमित पाल ने बताया कि जून के ट्रायल में हारने के बाद रोशिबिना करीब डेढ़ महीने तक राष्ट्रीय शिविर से बाहर थीं। दिव्यांशी के चोटिल होने के बाद 10 सितंबर को उन्हें टीम में शामिल किया गया। इसके बाद तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला। उन्होंने कहा कि कम समय के बावजूद रोशिबिना ने अपने अनुभव और आत्मविश्वास के दम पर अच्छा प्रदर्शन किया।

वुशू एसोसिएशन आफ इंडिया के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह बाजवा ने बताया कि रोशिबिना ने जकार्ता एशियाई खेलों में कांस्य, हांगझोऊ में रजत और अब लगातार तीसरी बार रजत पदक जीता है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन एशियाई खेलों में पदक जीतना बड़ी उपलब्धि है। भारतीय वुशू खिलाड़ियों ने लगातार छह एशियाई खेलों में पदक हासिल किए हैं। भारत के छह वुशू खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है, जिनमें रोशिबिना भी शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि भारत को 2027 में पहली कामनवेल्थ व विश्व चैंपियनशिप और 2028 में अहमदाबाद में पहली एशिया चैंपियनशिप की मेजबानी भी मिली है। बाजवा ने बताया कि बच्चों को वुशू में सब-जूनियर स्तर यानी 15 वर्ष से पहले जोड़ना बेहतर रहता है। वुशू के दो प्रमुख हिस्से सांडा और ताऊलू हैं। नार्थ-ईस्ट में ताऊलू के अच्छे खिलाड़ी हैं, जबकि सांडा में देश की 36 इकाइयों में काम हो रहा है।

डीएसपी भी बनीं रोशिबिना
2023 एशियाई खेलों के बाद मणिपुर सरकार ने रोशिबिना को खेल कोटे के तहत डीएसपी पद दिया। फिलहाल वह सक्रिय खेलों में हैं और खेल ड्यूटी पर ही रहती हैं। रोशिबिना ने बताया कि खेल से संन्यास लेने के बाद उन्हें प्रशासनिक कार्यालय या सर्किल की जिम्मेदारी मिल सकती है।

वुशू में रोजगार की भी संभावनाएं
कोच अमित पाल के अनुसार 2006 से एशियाई खेलों में शामिल होने के बाद भारतीय वुशू ने लगातार पदक दिए हैं। उन्होंने कहा कि सेना, अर्धसैनिक बलों, उत्तर प्रदेश पुलिस और अन्य प्रतिस्पर्धी खेलों में वुशू खिलाड़ियों के लिए रोजगार के अवसर भी हैं।