मेरठ, जेएनएन। वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी नरेंद्र पाल सिंह को निष्कासित करने के मेरठ बार एसोसिएशन के फैसले को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने स्थगित कर दिया है। काउंसिल चेयरमैन ने मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व महामंत्री को नोटिस देकर 15 दिनों में स्पष्टीकरण भी मांगा है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन अधिवक्ताओं की जांच समिति भी गठित की है।

18 को किया गया था निष्‍कासित

18 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र पाल सिंह की सदस्यता समाप्त करके उनको एसोसिएशन से निष्कासित कर दिया था। एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार उन्होंने जिला जज के सामने मेरठ बार एसोसिएशन और उसके अध्यक्ष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके निष्कासन के बाद बार काउंसिल ऑफ उप्र के सदस्य रोहिताश्व कुमार अग्रवाल व अधिवक्ता सतीश चंद गुप्ता ने बार काउंसिल ऑफ उप्र के चेयरमैन से मामले की शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया था कि मेरठ बार के अध्यक्ष और महामंत्री ने बार के नियमों का पालन नहीं किया। नरेंद्र पाल सिंह को उन्होंने कोई नोटिस तक नहीं दिया और सीधे निष्कासन कर दिया। उन्होंने काउंसिल से इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।

बिना नोटिस क्‍यों किया निष्‍कासन

बार काउंसिल ऑफ उप्र के चेयरमैन हरिशंकर सिंह ने इस शिकायत पर आदेश दिया है। उन्होंने पूछा है कि बिना कोई नोटिस जारी किए और बिना स्पष्टीकरण मांगे निष्कासन क्यों किया। तीन सदस्यीय कमेटी में अधिवक्ता इमरान माबूद खान, अरुण कुमार त्रिपाठी और अजय यादव हैं। मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मांगेराम और महामंत्री नरेश दत्त शर्मा का कहना है कि उनको अभी तक बार काउंसिल ऑफ उप्र का कोई पत्र नहीं मिला है। जब यह पत्र प्राप्त होगा तभी कुछ कहा जा सकेगा। इस संबंध में नरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनका निष्कासन वापस होगा। जिन लोगों ने उनका साथ दिया है वह उनके आभारी हैं। 

Posted By: Prem Bhatt

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