मेरठ,जेएनएन। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के मूíत जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में विधान के 33वें दिन गुरुवार को 450 परिवारों ने विधान में भाग लेकर पूजा-अर्चना की ओर पुण्य अर्जन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकर भगवंतों का जलाभिषेक कर किया। विधान में आचार्य भाव भूषण महाराज ने मंगल उद्बोधन में कहा कि जन्म लेना और जीवन जीना दोनों में अंतर होता है। जन्म तो पशु-पक्षी आदि भी लेते है लेकिन जीवन जीने की कला मनुष्य को ही आती है। आज हम इस कला को भूल रहे हैं। हमें अपने जीवन का मकसद हीं नहीं पता। इसलिए मनुष्य को सदमार्ग पर चलकर ही लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। हमें आधुनिक चकाचौंध से निकलकर आत्मा की दुनिया में रमना होगा।

शांतिधारा करने का सौभाग्य सुनील जैन, शशि जैन आदि को प्राप्त हुआ। सांयकाल भगवंतों की मंगल आरती की गई। विधान में दूर दराज से आये श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य का संचय किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, राजेंद्र जैन, अजीत प्रसाद जैन, कुणाल जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, अशोक जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा।

बंदरों के आतंक से मुक्ति को प्रार्थना पत्र : नगर ही नहीं बल्कि देहात में भी लोग बंदरों के आतंक से परेशान हैं। गांव मीवा में बंदरों के हमले से महिला समेत कई लोग चोटिल हो चुके हैं। ग्रामीण ने एसडीएम कार्यालय पर प्रार्थना पत्र देकर समस्या से निजात दिलाने की मांग उठाई है।

गांव निवासी नागरिक अधिकार मंच के राष्ट्रीय महासचिव रामकुमार शर्मा ने गुरुवार को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय पर ज्ञापन दिया। जिसमें कहा गया है कि गांव मीवा में पिछले कई दिनों से बंदरों का आतंक व्याप्त है। उन्होंने बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की गई है।

एसडीएम मवाना कमलेश गोयल ने कहा कि बंदरों के संबंध में स्थानीय निकाय व वन विभाग के अधिकारियों को विशेष दिशा निर्देश दिये गए हैं।

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