UP में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए परेशान हो रहे लोगों को राहत, पुरानी व्यवस्था के तहत निस्तारित होंगे लंबित आवेदन
Meerut News: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लंबे समय से लंबित आवेदनों को पुरानी व्यवस्था के तहत निपटाने ...और पढ़ें

मेरठ में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंचे लोग।
HighLights
दो साल से अधिक पुराने आवेदन निपटाने के निर्देश जारी।
मेरठ के हजारों आवेदकों को मिली बड़ी राहत।
जागरण संवाददाता, मेरठ। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लंबे समय से दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। शासन ने दो वर्ष से अधिक समय से लंबित पड़े जन्म और मृत्यु पंजीकरण के आवेदनों को शीघ्रता से निस्तारित करने के निर्देश जारी किए हैं। भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के तहत लागू होने वाली नई व्यवस्था से पहले, वर्तमान और पुरानी प्रक्रिया के अंतर्गत ही इन सभी लंबित मामलों का निपटारा किया जाएगा।
भारत सरकार द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में छह अगस्त को संशोधन किया गया था। इसके तहत दो साल से अधिक की देरी वाले आवेदनों के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सत्यापन आदेश को अनिवार्य करने का प्रविधान किया जा रहा है। हालांकि, नई व्यवस्था की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी तरह से शुरू न होने के कारण नगर निगम और एसडीएम कार्यालय के बीच आवेदनों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
इसके चलते सैकड़ों आवेदक महीनों से भटकने को मजबूर थे। निदेशक, जनगणना संचालन एवं नागरिक पंजीकरण द्वारा जारी निर्देश में यह स्पष्ट किया गया है कि संशोधन लागू होने से पहले संबंधित अधिकारियों के पास जितने भी लंबित मामले पड़े हैं, उन्हें वर्तमान में लागू व्यवस्था के तहत ही तुरंत निपटाया जाए। जब तक नई व्यवस्था का पोर्टल या गाइडलाइन पूरी तरह सक्रिय नहीं होती, तब तक जनता की असुविधा को दूर करने के लिए पुरानी नियमावली के आधार पर ही एसडीएम सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करेंगे।
आवेदकों को राहत
नगर निगम के तीनों जोनल कार्यालयों में हर महीने औसतन 4000 जन्म प्रमाण पत्र और 1000 मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन आते हैं। इनमें से 160 से अधिक मामले ऐसे हैं जो दो वर्ष से अधिक देरी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। नियमावली में आए बदलावों और विभागीय स्पष्टता के अभाव में लोग अपने बच्चों के स्कूल दाखिले, सरकारी योजनाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए परेशान हो रहे थे। शासन के इस फैसले से अब लंबित आवेदनों के निस्तारण पर तेजी से काम शुरू हो गया है। जिससे लोगों को कार्यालयों के बेवजह चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है और उनके प्रमाण पत्र समय से जारी हो रहे है।
अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार सिंह ने कहा कि दो साल की देरी वाले आवेदन एसडीएम कार्यालय को भेजे जा रहे हैं, उनका सत्यापन कर प्रमाण पत्र जारी हो रहा है। ये नई व्यवस्था प्रभावी होने तक चलेगा।
