तनाव और नींद की कमी से बढ़ रहे साइकोसिस के मामले, युवाओं में भी स्थिति चिंताजनक
तनाव और नींद की कमी के कारण साइकोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर 20 से 35 वर्ष ...और पढ़ें

HighLights
तनाव और नींद की कमी से बढ़ रहे साइकोसिस मामले।
अधिकांश मरीज 20 से 35 वर्ष के युवा वर्ग से।
तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण।
जागरण संवाददाता, मेरठ। ऐसी चीजें महसूस करना, जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं। ऐसी आवाजें सुनना, जो दूसरों को सुनाई नहीं देतीं और वास्तविकता से परे विचार आना। ये साइकोसिस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। इस समस्या के साथ लोग इलाज के लिए मेडिकल कालेज पहुंच रहे हैं। तनाव और नींद की कमी के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक सामने आए 66 मामलों में अधिकांश मरीज 20 से 35 वर्ष के युवा हैं।
लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के मानसिक रोग विभाग की एक जनवरी से एक अक्टूबर तक इलाज के लिए भर्ती मरीजों की रिपोर्ट में तनाव, नशे की लत और साइकोसिस के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई है। इस अवधि में तनाव संबंधी सर्वाधिक 113, नशे की लत के 92 और साइकोसिस के 66 मामले सामने आए। इसके अलावा बाईपोलर डिस आर्डर, डिसोसिएटिव डिस आर्डर, डिप्रेशन, चाइल्ड मेंटल रिटार्डेशन और डिमेंशिया सहित अन्य मानसिक बीमारियों के मरीज भी भर्ती हुए।
सामान्य दवाओं और उपचार से अपेक्षित सुधार नहीं होने पर विशेषज्ञों के चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद मरीजों का इलाज किया गया। इस बार की थीम है जीने के अनुभवों को सुना गया। सच्ची आवाजें, वास्तविक बदलाव है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के अनुभव सुनने और स्वास्थ्य सेवाओं तथा नीतियों में उनकी सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने को प्रेरित करती है।
तनाव छिपाने के बजाय नियंत्रित करने की कोशिश करें
एआई, डिजिटल एप्स, गेम्स और देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद कम हो रही है और तनाव बढ़ रहा है। इसका बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर साइकोसिस के रूप में पड़ रहा है। तनाव छिपाने के बजाय नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए। आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य जरूरी है, इसलिए मानसिक बीमारियों पर नियंत्रण आवश्यक है। बचाव के लिए सुबह 30 मिनट रोजाना टहलें, योग, मेडिटेशन करें। सात से आठ घंटे की गहरी नींद बेहद जरूरी है। स्क्रीन टाइम नियंत्रित करें।
-डा. तरुण पाल,मानसिक रोग विभागाध्यक्ष ,एलएलआरएम कालेज।
बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं
देर रात तक जागना, काम करना और संयुक्त परिवारों का विघटन मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। लगातार तनाव, एंजाइटी या डिप्रेशन से कार्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा रहता है। इससे हृदय, फेफड़ों, प्रतिरोधक क्षमता और हार्मोन संतुलन पर असर पड़ता है तथा बीपी और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डा. रवि राणा,मानसिक रोग विशेषज्ञ।
