मेरठ, जागरण संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खेल को लेकर पिछली सरकारों के गैरजिम्मेदाराना रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं को खेल में आगे बढ़ने के लिए कभी प्रोत्साहित ही नहीं किया गया। उनकी इच्छा है कि भविष्य की पीढ़‍ियां खेल को करियर के तौर पर चयन करने में पीछे न हटें।

मेजर ध्यान चंद खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 'पिछली सरकारों ने खेल के क्षेत्र में युवाओं की योग्यता को महत्व नहीं दिया। देश में खेल के विकास के लिए यह बहुत जरूरी है कि देश के युवाओं में खेल के प्रति भरोसा होना चाहिए और उन्हें खेल को अपने पेशे के तौर पर चुनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'यह मेरा संकल्प और सपना भी है कि हमारे युवा खेल को अन्य पेशे की ही तरह चुनें और करियर बनाएं।

सरकार की प्रमुखता को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 'खेल के क्षेत्र में संसाधन, प्रशिक्षण की आधुनिक सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय पहुंच और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता ही प्राथमिकता है। यह लक्ष्य हमने इस सरकार में हासिल भी किए हैं। मोदी ने कहा कि 'नई शिक्षा नीति में भी खेल को प्राथमिकता दी गई है। खेल को भी विज्ञान, कामर्स और अन्य वर्ग की ही तरह शामिल किया गया है। पहले खेल को अतिरिक्त गतिविधि के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब यह अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर हिस्से में खेल संस्कृति को बढ़ाने और विश्व स्तरीय खेल संसाधनों को विकसित करना ही प्राथमिकता है। मेजर ध्यान चंद खेल विवि उसी ध्येय को पूरा करने की दिशा में एक कदम है।

Edited By: Taruna Tayal