मेरठ, जागरण संवाददाता। Pitru Paksha 2021 पितृ पक्ष को लेकर जनमानस में तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। पितृ पक्ष 23 सितंबर से आरंभ हो गए हैं और छह अक्टूबर तक चलेंगे। भ्रांतियों के संबंध में दैनिक जागरण ने विद्वान, ज्योतिषविद् और धर्माचार्य से बात कर उनका पक्ष जाना। यहां पर उन्‍हीं के विचारों को प्रस्‍तुत किया जा रहा है।

इनका कहना है

पितृपक्ष गणेश चतुर्दशी और नवरात्रि के मध्य आते हैं। वैसे भी प्रविधान है कि कोई भी शुभ कार्य गणपति की स्तुति कर किया जाता है। अत: पितृ पक्ष में शुभ कार्य न करना पूरी तरह गलत परंपरा है।

- डा. एसके शर्मा, ज्योतिषविद्

श्राद्ध में क्रय-विक्रय करना निषेध नहीं है। खरीदारी नहीं करनी चाहिए, इसका शास्त्रों में भी कोई उल्लेख नहीं है। लोकाचार में जनता-जनार्दन इस पक्ष को अशुभ मानते हैं।

- डा. भारत भूषण चौबे, ज्योतिष विभागाध्यक्ष, बिल्वेश्वर संस्कृत महाविद्यालय मेरठ

श्राद्ध पक्ष पितरों के प्रति आदर और कृतज्ञता प्रकट करने का पक्ष होता है। हमारी प्रसन्नता से पितर भी प्रसन्न होते हैं। पितरों को अर्पित करते हुए अगर हम कुछ भी करते हैं तो वह शुभदायी होता है। मांगल कार्य इसलिए नहीं किए जाते हैं कि वर्ष के इस पक्ष में हम पूरी तरह पितरों के प्रति समर्पित रहें। नया सामान खरीदना, आभूषण खरीदना, प्लाट खरीदना, वाहन खरीदना किसी तरह अशुभ नहीं हैं अपितु फलदायी साबित होता है।

- इंद्रप्रस्थ पीठाधीश्वर कृष्ण स्वरूप महाराज, सिद्धपीठ पंचमुखी महादेव मंदिर ठठेरवाड़ा

पितृपक्ष में केवल मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं जैसे-विवाह संस्कार, उपनयन, नींव पूजन, मुंडन, गृह प्रवेश। इस बार पितृ पक्ष में खरीदारी के सात विशेष शुभ योग आएंगे। इनमें चार सर्वार्थ सिद्धि योग हैं। अगर पितृ पक्ष अशुभ होता तो यह शुभ योग क्यों आते। इनका पंचांग में भी उल्लेख है।

- आचार्य मनीष स्वामी

पितृ पक्ष में विशेष शुभ योग

दिनांक योग

24 सितंबर - सर्वार्थ सिद्धि योग

26 - रवि पुष्य योग

27 - सर्वार्थसिद्धियोग, अमृत सिद्धि, रवि पुष्य योग

30 सितंबर- सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि, रवि पुष्य योग

छह अक्टूबर- सर्वार्थ सिद्धि योग

Edited By: Prem Dutt Bhatt