मेरठ, जेएनएन। यह युद्ध नहीं, युद्ध से भी बढ़कर है। जहां हमें एक अ²श्य दुश्मन से मरीजों को बचाना है और खुद भी बचना है। पांच दिन हो गए हैं अपने घर को छोड़े हुए। आइसोलेशन वार्ड ही अब हमारा आशियाना है। अभी कितने दिन और जंग जारी रहेगी, यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना जरूर विश्वास दिलाते हैं कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की जान बचाने में हम जी-जान लगा देंगे। यह कहना है लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के कोविड-19 वार्ड में तैनात जूनियर डाक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह का। वैसे तो वह कोविड-19 वार्ड में पहले दिन से ड्यूटी दे रहे हैं। लेकिन 27 मार्च को कोरोना वायरस से संक्रमित पहला मरीज आने के बाद से वह घर नहीं लौटे।

उन्होंने बताया कि कोविड-19 वार्ड में एक शिफ्ट में एक जूनियर डाक्टर, एक नर्सिग स्टाफ, एक वार्ड ब्वॉय, एक टेक्नीशियन और एक स्वीपर की ड्यूटी होती है। वार्ड में प्रवेश से पहले पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट, पीपीई किट पहनते हैं। इसमें बड़ा गाउन और एन 95 मॉस्क होता है। इसके अलावा इसमें हेड कवर, शू कवर, चश्मा और ग्लब्स होते हैं। इस किट की खासियत यह है कि इसमें पानी आरपार नहीं जा सकता है। किट पहनने के बाद ही कोविड-19 वार्ड में प्रवेश करते हैं। यहां कम से कम छह घंटे रहना होता है। तीन शिफ्ट में अलग-अलग जूनियर डाक्टरों की टीम ड्यूटी दे रही है। खाना-पानी तो छोड़िए यूरिनल भी नहीं जाते

डा. धीरेंद्र ने बताया कि कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी के दौरान न तो पानी पी सकते हैं, न भोजन कर सकते हैं और न ही यूरिनल जा सकते हैं। मोबाइल का उपयोग भी नहीं कर सकते हैं। वार्ड से निकलने के बाद पीपीई किट को एक सुरक्षित स्थान पर उतारते हैं। इससे पहले सैनिटाइज होते हैं। फिर आइसोलेशन ओटी के कपड़े पहनते हैं। यह किट फौरन डिस्पोजेबल के लिए बंद पात्र में भेज दी जाती है। अर्थात किट का उपयोग दोबारा नहीं होता। इस प्रक्रिया से गुजरना बहुत कठिन है। जरा सी चूक संक्रमित कर सकती है। डिस्पोजेबल पात्र में होता है खाना

कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे डाक्टर, नर्स समेत पूरा स्टाफ डिस्पोजेबल पात्र में ही भोजन करते हैं। इसके लिए अलग एक कक्ष है। बर्तन का उपयोग यहां मना है। भोजन के फौरन बाद यह पात्र सैनिटाइज करने के साथ डिस्पोज कर दिए जाते हैं। मरीज की देखभाल के चलते भोजन का कोई समय निश्चित नहीं है। इनसेट:---

पत्नी को है इंतजार, मां से दो दिन पहले हुई थी बात

डा. धीरेंद्र ने बताया कि उनकी शादी इसी साल जनवरी में हुई है। कॉलेज में ही तैनात डा. दीक्षा सिंह उनकी पत्नी हैं। कोविड-19 वार्ड से बाहर जब चिकित्सक कक्ष में आते हैं तब उनसे बात होती है। पांच दिन हो गए हैं। वह घर लौटने का इंतजार कर रही हैं। मां से भी दो दिन पहले बात हुई थी। लेकिन यह इंतजार लंबा है। एक टीम सात दिन कोविड-19 वार्ड में रहेगी। इसके बाद हॉस्पिटल प्रबंधन की निगरानी में पूरा स्टाफ 14 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाएगा। इसके बाद फिर जरूरत पड़ी तो ड्यूटी पर लौटेंगे। घर कब लौटेंगे, यह पता नहीं।

Posted By: Jagran

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