मेरठ, [सुशील कुमार]। देश को हिलाकर रख देने वाले निर्भया कांड के गुनहगारों को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद को चुना गया है। बुधवार को पवन से फांसी के बारे में बातचीत की गई। उसकी इच्छा है कि उसके सात बच्चों में से एक बेटा पुश्तैनी काम संभाले। पवन से बातचीत के कुछ अंश...

फांसी देने के पहले भगवान से क्या प्रार्थना करोगे?

बेटियों के साथ गंदा काम करने वालों को दुनिया में रहने का हक नहीं है। सजा मिलेगी तो शायद कोई ऐसा घिनौना कृत्य करने से पहले दस बार सोचेगा। हैदराबाद कांड में भी दोषियों को समय पर सजा मिल गई, यह बहुत ही अच्छा हुआ है। पुलिस नहीं देती तो उन्हें न्यायपालिका सजा देती।

सजायाफ्ता बंदी किस नजर से देखते हैं?

चौधरी चरण सिंह जेल में बंदी मुझे घृणा की नजर से देखते हैं। फांसी देते वक्त मेरे दिमाग में सिर्फ यही रहता है कि यह हमारा काम है और हमें काम करना है।

अब फांसी देने के लिए आपकी क्या तैयारियां हैं?

मुझे पुलिस सुरक्षा दी गई है। पिछले दिनों मैं मेरठ जेल में फांसी देने की प्रैक्टिस भी कर चुका हूं। मुङो फांसी देने के लिए 30 जनवरी को दिल्ली तिहाड़ जेल बुलाया गया है।

आपने इससे पहले भी कभी किसी को फांसी दी है?

1988 में जब दादा कल्लू ने 5 लोगों को फांसी दी थी तब मैं उनके साथ था। जिसमें 2 अपराधियों को पटियाला, एक को आगरा, एक को जयपुर और एक को प्रयागराज में फांसी दी गई थी। मेरे पिताजी मम्मू ने भी दो लोगों को फांसी दी थी, लेकिन चार लोगों को एक साथ फांसी देने का यह पहला मामला है। मेरठ जेल में निठारी कांड के अपराधी सुरेंद्र कोली को फांसी देने का ट्रायल कर चुका हूं।

किस उम्र से आप फांसी देना देख रहे हैं ?

दादाजी के साथ मैं फांसी के तख्ते पर चढ़ने वाले कैदियों के पैर बांधा करता था। मैं अभी 54 साल का हूं। दादाजी के साथ तो मैं 22 साल की उम्र से जाने लगा था।

आपका निजी काम क्या है?

कपड़े का बिजनेस करता हूं, क्योंकि 5 हजार रुपये में आजकल होता ही क्या है। ऐसे में हमें कोई दूसरा काम तो करना ही पड़ेगा।

निर्भया के गुनाहगारों को फांसी के बाद क्या उम्मीद करेंगे?

निर्भया के गुनाहगारों को फांसी देने के बाद सरकार को प्रति माह बीस हजार के मानदेय का प्रस्ताव भेजा जाएगा। जेल प्रशासन से इस संबंध में बातचीत भी कर चुका हूं। मानदेय कम मिलने से काम करने का मन नहीं करता है।

आपके भाइयों ने यह काम क्यों नहीं चुना?

इस काम के लिए काफी ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। मैंने बचपन से ही अपने दादा से इसकी ट्रेनिंग ली है। यही वजह है कि पिताजी के बाद मैंने ही उनकी विरासत को आगे बढ़ाया है। अब मेरी इच्छा है कि मेरा बड़ा बेटा यह काम संभाले।

Posted By: Taruna Tayal

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